Home » कानपुर समाचार » अमीन लायल को पाकिस्तान में नाबालिग से बलात्कार के झूठे आरोप में 5 साल: बरी : कानपुर पुलिस की गंभीर लापरवाही

अमीन लायल को पाकिस्तान में नाबालिग से बलात्कार के झूठे आरोप में 5 साल: बरी : कानपुर पुलिस की गंभीर लापरवाही

पुलिस ने बिना उचित जांच के अमीन लायल को गिरफ्तार कर लिया और ‘विक्की’ नामक आरोपी मान लिया पुलिस ने  बिना वाजिब कारण के गिरफ्तार और थाने में जबरदस्ती कबूलवाने का प्रयास: पिता
अदालत निर्देश पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए जो इस मामले में शामिल
कानपुर 26 जून, 2025
कानपुर में पुलिस की लापरवाही का एक गंभीर मामला हाल ही में सामने आया है, जिसमें एक युवक, अमीन लायल को पाकिस्तान में एक नाबालिग से बलात्कार के झूठे आरोप में 5 साल जेल बिताने के बाद बरी किया गया। यह मामला तब शुरू हुआ जब 25 मई 2021 को एक महिला ने बिधनू थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उसके 13 वर्षीय बेटी के साथ रेप हुआ है। पुलिस ने बिना उचित जांच के अमीन लायल को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया और उसे ‘विक्की’ नामक आरोपी मान लिया.
अमीन के पिता का कहना है कि पुलिस ने उनके बेटे को बिना किसी वाजिब कारण के गिरफ्तार किया और थाने में उसे जबरदस्ती कबूलवाने का प्रयास किया। अमीन की गिरफ्तारी के समय उसने अपना नाम साफ बताया कि वह विक्की नहीं है, फिर भी पुलिस ने सुनने से इंकार कर दिया। थाने में उसे अत्यधिक मारपीट का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उसका कान का पर्दा तक फट गया.
जेल में बिताए गए पाँच वर्षों बाद, विशेष पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने उसकी बरी कर दी, यह स्वीकार करते हुए कि पुलिस ने पूरे मामले में गंभीर लापरवाही बरती थी। अदालत ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए जो इस मामले में शामिल थे.
अमीन को जेल में रखने का यह मामला कानपुर पुलिस की कार्यप्रणाली संबंधी गंभीर सवालों को उठाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवेचक ने न तो मूल आरोपी (विक्की) को पहचानने की प्रक्रिया पूरी की और न ही अमीन के खिलाफ ठोस सबूत प्रस्तुत किए.
पूरा मामला यह दर्शाता है कि पुलिस ने ना केवल आरोपी की पहचान में लापरवाही बरती, बल्कि पूरे प्रक्रिया में बहुस्तरीय त्रुटियां की, जिसके चलते एक निर्दोष व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में बिताना पड़ा. घटना इस बात की याद दिलाती है कि न्यायपालिका को पुलिस की लापरवाहियों पर नजर रखने और निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्यरत रहना चाहिए।

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