समिति प्रोफेसर अनिल सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता में
समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया
उपलब्ध काउंसलिंग सेवाएं, शिकायत निवारण तंत्र और छात्र सहायता प्रणाली प्रभावी हैं या नहीं
कानपुर: 22 जनवरी 2026
केंद्र सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-कानपुर में छात्रों की आत्महत्याओं की बढ़ती घटनाओं के संदर्भ में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति प्रोफेसर अनिल सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता में बनाई गई है, जो राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (एनईटीएफ) के चेयरमैन भी हैं.
यह समिति मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों के लिए जिम्मेदार होगी:
आत्महत्याओं की जांच: समिति आईआईटी कानपुर में हुई हाल की आत्महत्याओं की परिस्थितियों की गहन समीक्षा करेगी। यह घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करेगी, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाएं: समिति यह देखेगी कि क्या संस्थान में छात्रों के लिए उपलब्ध काउंसलिंग सेवाएं, शिकायत निवारण तंत्र और छात्र सहायता प्रणाली प्रभावी हैं या नहीं.
संवेदनशीलता और उपाय: समिति यह सुनिश्चित करेगी कि पिछले वर्ष जुलाई में जारी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी दिशा-निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है. इसके साथ ही, यह भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सुझाव भी देगी.
अभिलेखों की मांग: समिति आईआईटी कानपुर के प्रशासन, छात्रों, शिक्षकों और प्रभावित परिवारों से संवाद करेगी और आवश्यक सूचनाएँ एवं दस्तावेज़ मांगेगी.
समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि क्यों ऐसी गंभीर घटनाएँ हो रही हैं और भविष्य में इन्हें कैसे रोका जा सकता है.
समिति बढ़ती आत्महत्याओं को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम हैं और छात्रों को एक सुरक्षित और सहायक अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास है.










