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उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने पर अपर मुख्य सचिवको 20 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार आयोग में नियुक्तियों की लिखित स्थिति प्रस्तुत करने को कहा था
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में जून 2024 से अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने पर नाराजगी
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह सख्त रुख अपनाया
कानपुर: 8 जुलाई 2026
लखनऊ: 8 जुलाई 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में जून 2024 से अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने पर कड़ी नाराजगी जताई है और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) को 20 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि विभाग में अपर मुख्य सचिव की तैनाती नहीं है, तो उनकी जगह प्रमुख सचिव को उपस्थित होना होगा.
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह सख्त रुख शम्स तबरेज द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अपनाया है.
मामले से जुड़ी मुख्य बातें
अदालत के आदेश का अनादर: इससे पहले 24 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आयोग में नियुक्तियों की स्थिति पर एक स्पष्ट लिखित निर्देश प्रस्तुत करने को कहा था.
सिर्फ मौखिक दलीलें: जुलाई में हुई सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट को केवल मौखिक रूप से बताया कि नामांकन की प्रक्रिया चल रही है. इस पर अदालत ने इसे अपने पूर्व आदेश के प्रति “अत्यंत अनादरपूर्ण रवैया” माना.
2024 से ठप है आयोग: हाईकोर्ट ने चिंता व्यक्त की कि पिछले अल्पसंख्यक आयोग का कार्यकाल वर्ष 2024 में ही समाप्त हो चुका था, लेकिन सरकार ने इतने लंबे समय के बावजूद अब तक नए अध्यक्ष या सदस्यों का पुनर्गठन नहीं किया है. अगली सुनवाई और कार्रवाई
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को तय की है. इस तारीख को संबंधित वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होकर यह औपचारिक स्पष्टीकरण देना होगा कि आयोग में नियुक्तियाँ करने में इतनी देरी क्यों हो रही है. जब न्यायालय किसी मामले में अधिकारी को तलब करता है, तो यह आमतौर पर या तो व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए होता है, या फिर किसी रिपोर्ट/हलफनामे के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने के लिए।
“अपर मुख्य सचिव” का तलब किया जाना दर्शाता है कि मामला राज्य सरकार के शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर पहुँच गया है।

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