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कानपुर का औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र वर्तमान में दो बिल्कुल विपरीत परिस्थितियां:अमेरिकी टैरिफ नीतियों से व्यापार जगत में हड़कंप: दूसरी ओर IIT कानपुर की स्वास्थ्य तकनीक चिकित्सा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी

निर्यातकों के लगभग 100 करोड़ रुपये के निर्यात ऑर्डर अमेरिकी खरीदारों द्वारा होल्ड
अमेरिकी खरीदार 20% से 25% तक की छूट मांग रहे हैं,  निर्माताओं के लिए  मुमकिन नहीं
इस डिवाइस को भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से टेस्ट लाइसेंस प्राप्त
कानपुर: 11 अगस्त 2026
 कानपुर का औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र वर्तमान में दो बिल्कुल विपरीत परिस्थितियों से गुजर रहा है, जहाँ एक ओर अमेरिकी टैरिफ नीतियों से व्यापार जगत में हड़कंप मचा है, तो दूसरी ओर IIT कानपुर की स्वास्थ्य तकनीक चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत बनकर उभरी है।
करोड़ों के ऑर्डर रुके: अकेले कानपुर के निर्यातकों के लगभग 100 करोड़ रुपये के निर्यात ऑर्डर अमेरिकी खरीदारों द्वारा होल्ड (रोक) कर दिए गए हैं।
प्रमुख क्षेत्र प्रभावित: शहर के सबसे बड़े चमड़ा (लेदर) और टेक्सटाइल उद्योग इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अमेरिकी खरीदार अब उत्पादों पर 20% से 25% तक की छूट मांग रहे हैं, जो स्थानीय निर्माताओं के लिए मुनाफे के लिहाज से मुमकिन नहीं है।
विकल्प की तलाश: इस व्यापारिक तनाव के चलते कानपुर के उद्यमी अब अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम कर रहे हैं और घरेलू भारतीय बाजार के साथ-साथ अफ्रीका व यूरोप के नए खरीदारों की तलाश में जुट गए हैं।
आसान और किफायती जांच: पारंपरिक रूप से EEG मशीनें काफी महंगी और जटिल होती हैं। IIT कानपुर की यह स्वदेशी डिवाइस दिमाग की बीमारियों की जांच को बेहद सस्ता और सुलभ बना देगी।
CDSCO से मंजूरी: इस डिवाइस (Menteve EEG-MED) को भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से टेस्ट लाइसेंस प्राप्त हो चुका है, जो इसके जल्द ही व्यावसायिक बाजार और अस्पतालों में आने का रास्ता साफ करता है।
तनाव और स्ट्रोक में मददगार: आईआईटी कानपुर के शोधकर्ता इस तकनीक के जरिए मस्तिष्क की अल्फा तरंगों (Alpha Waves) का अध्ययन कर रहे हैं ताकि तनाव, अवसाद और दिमागी कार्यप्रणाली पर इसके असर को सटीक रूप से मापा जा सके। साथ ही, इस EEG सिग्नल तकनीक का उपयोग पैरालिसिस या स्ट्रोक के मरीजों के रोबोटिक पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए भी किया जा रहा है। 1. अमेरिकी टैरिफ का कानपुर के उद्योगों पर प्रभाव
अमेरिकी सीनेट द्वारा पारित नए व्यापारिक कानूनों और अतिरिक्त टैरिफ (जो कुछ मामलों में 100% तक बढ़ सकते हैं) ने कानपुर के पारंपरिक निर्यातकों की कमर तोड़ दी है:
2. IIT कानपुर का नया EEG डिवाइस:
स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उम्मीद
आर्थिक मोर्चे पर मिले इस झटके के बीच, IIT कानपुर के स्टार्टअप (Menteve) और शोधकर्ताओं ने एक सस्ती और पोर्टेबल इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) डिवाइस विकसित की है, जो न्यूरोलॉजिकल (दिमाग से जुड़ी) बीमारियों के इलाज में गेम-चेंजर साबित होगी:
जहाँ अमेरिकी नीतियों ने कानपुर के पारंपरिक व्यापारियों को अपनी बाजार रणनीति बदलने पर मजबूर किया है, वहीं आईआईटी कानपुर के इस आविष्कार ने देश के हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है।

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