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गुजरात हाईकोर्ट: 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में 38 दोषियों की मौत की सज़ा: 11 को उम्रकैद की सज़ा बरकरार

भारत का पहला मामला है जिसमें एक साथ 38 लोगों को मौत की सज़ा
राज्य सरकार पीड़ित परिवारों को ₹10 लाख और गंभीर घायल लोगों को ₹5 लाख मुआवज़ा दे
70 मिनट में 21 धमाके, जिनमें 56 लोगों की मौत और 200 से अधिक घायल
कानपुर: 13 जुलाई 2026
अहमदाबाद: 13 जुलाई 2026

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में महज़ 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिसमें 56 निर्दोष लोगों की जान गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस हमले के पीछे प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘इंडियन मुजाहिद्दीन’ (IM) और ‘सिमी’ (SIMI) का हाथ था। लगभग 18 साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट का यह फैसला न्याय की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है। हालांकि, दोषियों के पास इसके बाद भी अभी देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में अपील करने का वैधानिक विकल्प मौजूद है
गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में 38 दोषियों की मौत की सज़ा और 11 को उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी है। अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ित परिवारों को ₹10 लाख और गंभीर रूप से घायल लोगों को ₹5 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया।
अहमदाबाद ब्लास्ट केस – मुख्य तथ्य
तारीख: 26 जुलाई 2008
घटनाएँ: 70 मिनट में 21 धमाके, जिनमें 56 लोगों की मौत और 200 से अधिक घायल हुए।
स्थान: बस स्टैंड, भीड़भाड़ वाले इलाके और अस्पताल भी निशाना बने – यह भारत में पहली बार था जब अस्पतालों को आतंकवादी हमले में टारगेट किया गया।
जांच: 35 FIR दर्ज हुईं, 78 आरोपियों पर मुकदमा चला।
विशेष अदालत का फैसला (फरवरी 2022): 49 दोषी करार, जिनमें से 38 को मौत की सज़ा और 11 को उम्रकैद।
हाईकोर्ट का फैसला (7 जुलाई 2026)
न्यायाधीश: जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर जे. डेव।
निर्णय: सभी अपीलें खारिज, विशेष अदालत का फैसला बरकरार।
मुआवज़ा आदेश:
मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख
गंभीर रूप से घायल को ₹5 लाख
हल्की चोट वाले को ₹1 लाख
भुगतान की अंतिम तिथि: 31 मार्च 2027
दोषियों की पहचान
दोषियों में भारतीय मुजाहिदीन (IM) और स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े लोग शामिल।
प्रमुख नाम: सफदर नागोरी (पूर्व SIMI नेता) और उसके सहयोगी, जो गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से थे।
महत्व
यह भारत का पहला मामला है जिसमें एक साथ 38 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई।
फैसले को सरकार ने “ऐतिहासिक विजय” बताया।
दोषियों को अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार है

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