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गैंगस्टर एक्ट के गलत इस्तेमाल पर फटकार : इलाहाबाद उच्च न्यायालय

कई बार सिविल विवादों के मामलों में भी इस कानून का इस्तेमाल
गैंगस्टर एक्ट का इस्तेमाल केवल तब जब कोई संगठित अपराध या हिंसक गतिविधियाँ में
पुलिस राजनीतिक की आकाओं को खुश करने के लिए कार्य करने की प्रवृत्ति पर सख्त
कानपुर: 6 जून 2026
प्रयागराज: 6 जून 2026
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस के द्वारा गैंगस्टर एक्ट के गलत इस्तेमाल पर कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने पुलिस की कार्रवाइयों को “चुनिंदा” और “मनमाना” बताते हुए इसके दुरुपयोग की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें कई बार सिविल विवादों के मामलों में भी इस कड़े कानून का इस्तेमाल किया गया। यह मामला विशेष रूप से गाजियाबाद में तीन परिवार के सदस्यों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की लागू की गई धाराओं से संबंधित था, जिसे न्यायालय ने रद्द कर दिया।
जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने उल्लेख किया कि पुलिस अधिकारियों की वफादारी संविधान के प्रति नहीं, बल्कि सत्ताधारी सरकार के प्रति है। अदालत ने कहा कि कई बार पुलिस ने सिर्फ अपनी छवि सुधारने या आंकड़े बेहतर दिखाने के लिए किसी नागरिक पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की।
उच्च न्यायालय ने यह भी पाया कि प्रयुक्त किए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं था और गिरफ्तारी पूरी तरह से अवैध थी। ललिता त्यागी नाम की एक गृहिणी को केवल आरोपों के आधार पर 80 दिन तक न्यायिक हिरासत में रखा गया, जबकि उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं था。
कोर्ट ने यह भी पुष्टि की कि गैंगस्टर एक्ट का इस्तेमाल केवल तब किया जाना चाहिए जब कोई संगठित अपराध या हिंसक गतिविधियाँ प्रदर्शन में हों, न कि व्यक्तिगत रंजिशों या सिविल विवादों के मामलों में। अदालत ने यह भी कहा कि बिना उचित प्रक्रियाओं का पालन किए हुए हुई गिरफ्तारियां संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस को इस बिल्कुल स्पष्ट चेतावनी दी कि गैंगस्टर एक्ट का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और ऐसे मामले किसी भी समय जांचे जाएंगे。 अदालत ने चिन्हित किया कि प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही की समस्या है और पुलिस को अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए कार्य करने की प्रवृत्ति पर भी सख्त निंदा की।
गैंगस्टर एक्ट का उद्देश्य→
गैंगस्टर एक्ट का मुख्य उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों और गिरोहों को नियंत्रित करना और दंडित करना है जो:→
•समाज में आतंक फैलाते हैं।
•लोगों से धन उगाही (जबरन वसूली) करते हैं।
•अपहरण, हत्या, डकैती, और अवैध गतिविधियों में शामिल होते हैं।
•संगठित गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों का संचालन करते हैं।
इस एक्ट के तहत अपराधों की श्रेणी
गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत कई प्रकार के अपराध आते हैं, जैसे:→
•अपहरण और फिरौती की मांग करना।
•जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों में बल प्रयोग करना।
• व्यवसायियों और आम जनता को धमकी देकर उनसे पैसे उगाही करना।
•किसी गिरोह में शामिल होकर किसी भी प्रकार का अपराध करना।
•अन्य किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधियाँ करना जो समाज के लिए हानिकारक हो।
गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत सजा:→
गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराधी को सख्त सजा दी जाती है। इसके अंतर्गत आरोप सिद्ध होने पर जेल की सजा, संपत्ति जब्त करना, और अन्य कड़ी कार्रवाई हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति पर जबरन वसूली का आरोप सिद्ध होता है और वह एक संगठित गिरोह का हिस्सा होता है, तो उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है और उसे जेल में सजा दी जा सकती है।
उदाहरण:→
मान लीजिए, एक गिरोह है जो किसी इलाके में व्यापारियों से जबरन वसूली करता है। यह गिरोह व्यापारियों को धमकी देता है कि अगर उन्होंने पैसे नहीं दिए तो उनके साथ हिंसा की जाएगी या उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाएगा। ऐसे में इस गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। पुलिस इस गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार कर सकती है, और अगर उनके अपराध साबित होते हैं, तो उन्हें गैंगस्टर एक्ट के तहत कड़ी सजा मिल सकती है।
गैंगस्टर एक्ट की उपयोगिता और प्रभाव:→
गैंगस्टर एक्ट का सकारात्मक प्रभाव यह है कि इससे समाज में संगठित अपराधियों पर लगाम लगाई जा सकती है। लोग अपनी सुरक्षा के प्रति थोड़ा आश्वस्त महसूस करते हैं, और अपराधियों को सख्त सजा का डर रहता है। इससे असामाजिक तत्वों के हौसले पस्त होते हैं और वे अपराध करने से बचते हैं।
निष्कर्ष:→
गैंगस्टर एक्ट एक महत्वपूर्ण कानून है जो समाज को अपराधियों से सुरक्षित रखने में सहायक है। इस कानून के माध्यम से पुलिस और न्यायालय को संगठित अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने का अधिकार मिलता है, जिससे समाज में शांति और सुरक्षा बनी रहती है।
गैंगस्टर एक्ट को उन मामलों में स्वीकार किया जाता है जहाँ किसी व्यक्ति या समूह द्वारा संगठित और असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने के स्पष्ट प्रमाण होते हैं। यह कानून अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए बनाया गया है, ताकि समाज में शांति और सुरक्षा को बनाए रखा जा सके।

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