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पिता के निर्मित उपयोग मे आ रहे 250 मीटर 60 फीट गुणा 45 फीट मकान का 3 भागो मे विधिक बटवारा

मृत्यु बिना वसीयत के हुई है, तो सभी बच्चों (बेटे-बेटी) का समान अधिकार
कुल 250 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के (3) समान हिस्से कानूनी रूप से दिए जाएंगे।
प्रत्येक को ({250/3} लगभग 83.33 वर्ग मीटर) कानूनी रूप से दिए जाएंगे।
विधिक बंटवारे के लिए आपके पास दो मुख्य विकल्प
1. आपसी सहमति पारिवारिक समझौता
2. न्यायालय द्वारा बंटवारा
कानपुर: 12 जून 2026
कानूनी जानकारी और स्पष्टीकरण:
कानून के अनुसार, यदि संपत्ति पैतृक है या पिता की मृत्यु बिना वसीयत के हुई है, तो सभी बच्चों (बेटे-बेटी) का समान अधिकार होता है। कुल (250\ वर्ग मीटर क्षेत्रफल के भूभाग के (3) समान हिस्से (अर्थात प्रत्येक को ({250/3}}लगभग 83.33) वर्ग मीटर) कानूनी रूप से दिए जाएंगे।
विधिक बंटवारे के लिए आपके पास दो मुख्य विकल्प हैं:
1. आपसी सहमति पारिवारिक समझौता
सभी भाई-बहन आपसी सहमति से $ निर्मित मकान व भूखंड को तीन बराबर हिस्सों में बाँट सकते हैं।
प्रक्रिया: इसे एक सादे या गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर लिखित में तैयार करें।
पंजीकरण: संपत्ति को सुरक्षित करने के लिए इस ‘पारिवारिक समझौते (Family Settlement Deed)’ को उप-पंजीयक (Sub-Registrar) कार्यालय में जाकर पंजीकृत (Register) करवाएं।
इसके बाद स्थानीय नगर निगम या प्राधिकरण (उदा. कानपुर विकास प्राधिकरण या नगर निगम) में नए नक्शे या संपत्ति कर (House Tax) में बदलाव के लिए आवेदन करें।
2. न्यायालय द्वारा बंटवारा (Partition Suit)
यदि तीनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो संपत्ति का कानूनी विभाजन सिविल कोर्ट के माध्यम से ही संभव है। प्रक्रिया: इसके लिए आपको अपने क्षेत्र के दीवानी न्यायालय (Civil Court) में एक बंटवारे का मुकदमा (Partition Suit) दायर करना होगा।
न्यायालय संपत्ति का मूल्यांकन करेगा और एक कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करेगा, जो मौके पर जाकर तीनों हिस्सों की पैमाइश कर रिपोर्ट सौपेगा।
उसके बाद न्यायालय द्वारा फाइनल डिक्री (Final Decree) पारित की जाएगी, जिसके आधार पर संपत्ति का वास्तविक विभाजन होगा। [8]
ध्यान रखने योग्य मुख्य बातें: यदि संपत्ति स्वअर्जित है (पिता ने स्वयं खरीदी है): तो पिता को यह अधिकार है कि वह अपनी वसीयत (Will) के अनुसार संपत्ति किसी एक या किन्हीं दो बच्चों के नाम भी कर सकते हैं। यदि कोई वसीयत नहीं है, तो सभी $3$ बच्चों व पत्नी (यदि जीवित हैं) को बराबर हिस्सा मिलेगा।
यदि संपत्ति पुश्तैनी/पैतृक है: तो जन्म से ही तीनों बच्चों का हिस्सा तय हो जाता है। बेटियों को भी बेटों के बराबर ही कानूनी हिस्सा मिलेगा।
यदि आप, संपत्ति का बंटवारा करने के लिए कानूनी रूप से पहला कदम उठाना चाहते हैं या दस्तावेज तैयार करना चाहते हैं: क्या सभी तीन हिस्सेदारों (भाई-बहन) के बीच आपसी सहमति है?
क्या पिता की ओर से पहले से कोई वसीयत (Will) बनाई गई है?
इन बातों के आधार पर आप अपना निर्णय ले सकते हैं।
हिन्दू उत्तराधिकार कानून के तहत, पिता की संपत्ति का विभाजन इस बात पर निर्भर करता है कि वह संपत्ति पैतृक (Ancestral) है या स्व-अर्जित (Self-Acquired)।
संपत्ति के विभाजन के लिए निम्नलिखित बातों को समझना आवश्यक है:
1. संपत्ति का प्रकार और अधिकार
पैतृक संपत्ति: पिता को यह (250) वर्ग मीटर (लगभग (60 x45) फीट) का भूभाग अपने पिता, दादा या परदादा से विरासत में मिला है, तो उस पर बेटे और बेटियों का जन्म से अधिकार ( होता है।
स्व-अर्जित संपत्ति: यदि पिता ने यह मकान या भूखंड खुद की कमाई से खरीदा है या उन्हें उपहार में मिला है, तो वे जीवनकाल में इसके पूर्ण स्वामी हैं。 वे जिसे चाहें अपनी वसीयत (Will) के जरिए यह संपत्ति दे सकते हैं ।
2. तीन भागों में विभाजन का नियम
पिता बिना कोई वसीयत बनाए (Intestate) दिवंगत हो जाते हैं या संपत्ति पैतृक है, तो इसे सभी Class-I कानूनी वारिसों (जैसे- पत्नी, सभी बेटे और सभी बेटियाँ) के बीच बराबर बांटा जाता है। यदि आप तीन भाई हैं और केवल आप तीनों के बीच ही संपत्ति का बंटवारा होना है,
3. विधिक प्रक्रिया और केस लॉ
संपत्ति का स्पष्ट और विधिक बंटवारा करने के लिए निम्नलिखित कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं:
बंटवारे का विधिक नोटिस (Partition Deed): यदि परिवार आपसी सहमति से बंटवारा कर रहा है, तो एक वकील के माध्यम से विभाजन विलेख (Partition Deed) तैयार करवाकर उसे उप-पंजीयक (Sub-Registrar) कार्यालय में पंजीकृत (Register) अवश्य कराएं।
बंटवारे का दीवानी वाद (Partition Suit): यदि परिवार के सदस्य बंटवारे पर सहमत नहीं होते हैं, तो सिविल कोर्ट में बंटवारे का मुकदमा दायर करना होता है।
प्रमुख केस लॉ :
विनीत शर्मा बनाम राकेश शर्मा 2020: सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बेटी को भी बेटे के समान ही जन्म से संपत्ति का अधिकार प्राप्त है (चाहे उसका जन्म 2005 से पहले हुआ हो या बाद में)।
अंगादी चंद्रन्ना बनाम शंकरा 2025: सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है कि एक बार वैध रूप से संयुक्त परिवार की संपत्ति का विभाजन हो जाने के बाद, हर हिस्सेदार को आवंटित संपत्ति उनका निजी (Self-acquired) स्वामित्व बन जाती है।

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