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भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं: मोदी सरकार

भारतीय पासपोर्ट अधिनियम (1967) की धारा 20 गैर-भारतीय नागरिकों को पासपोर्ट  का अधिकार
पासपोर्ट नागरिकता के प्रमाणपत्र के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं
पासपोर्ट केवल यात्रा के उद्देश्यों के लिए एक दस्तावेज़
भारतीय नागरिकता का स्पष्ट निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत किया जाता है।
कानपुर: 25 जून 2026
नई दिल्ली: 25 जून 2026
मोदी सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है, बल्कि एक यात्रा दस्तावेज़ है। इस विषय पर हो रहे राजनीतिक विवादों ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं, जिनका उत्तर देना आवश्यक है।
पासपोर्ट ऐसा दस्तावेज़ है, जिसे संप्रभु राष्ट्र (जैसे भारत) अपने नागरिकों को अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी करता है। हालांकि, भारत सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट नागरिकता के प्रमाणपत्र के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। पासपोर्ट केवल यात्रा के उद्देश्यों के लिए एक दस्तावेज़ है और इसके द्वारा कोई नागरिकता स्थापित नहीं होती।
इस दावे की पुष्टि करते हुए, भारतीय पासपोर्ट अधिनियम (1967) की धारा 20 के तहत, सरकार जनहित में गैर-भारतीय नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी करने का अधिकार रखती है। पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा सत्यापन किया जाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत सरकार गैर-भारतीय नागरिकों को बिना किसी परीक्षण या सत्यापन के पासपोर्ट प्रदान कर रही है। यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी के आधार पर पासपोर्ट प्राप्त करता है, तो उसे रद्द किया जा सकता है।
पासपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया में विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा कई स्तरों का सत्यापन किया जाता है। पुलिस वेरिफिकेशन एवं अन्य दस्तावेज़ों की जांच की जाती है, जिनमें आवेदक के पहचान प्रमाण भी शामिल होते हैं।भारतीय पासपोर्ट को बायोमेट्रिक डेटा जैसी सुरक्षा सुविधाओं के साथ चिप आधारित ई-पासपोर्ट के रूप में पेश किया जा रहा है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता में वृद्धि होगी और धोखाधड़ी के जोखिम को कम किया जाएगा । भारतीय पासपोर्ट को यात्रा दस्तावेज़ के रूप में महत्वपूर्ण माना जाता है, इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। भारतीय नागरिकता का स्पष्ट निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत किया जाता है। इस संदर्भ में, नागरिकता सिद्ध करने के लिए एक सार्वभौमिक दस्तावेज़ की अनुपस्थिति अधिक जटिलता का कारण बनती है, जिससे नागरिकों के लिए अपनी नागरिकता सिद्ध करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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