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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और महाराजपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने हाईवे किनारे 36 अवैध कब्जों को दिया हटा

NHAI इंचार्ज अतुल शर्मा, पेट्रोलिंग अधिकारी शैलेंद्र शर्मा और हाईवे चौकी प्रभारी पवन शर्मा की कार्रवाई
अदालत का स्पष्ट मानना है कि कानून का शासन सर्वोपरि
किसी भी नागरिक को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के बेदखल नहीं किया जा सकता।
कानपुर: 30 जुलाई 2026
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और महाराजपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने कानपुर के महाराजपुर में हाईवे के किनारे 36 अवैध कब्जों को बुलडोजर चलाकर हटा दिया है। 30 जुलाई 2026 को चलाए गए इस अतिक्रमण हटाओ अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और यातायात को सुचारू बनाना है।
मुख्य बिंदु और कार्रवाई का विवरण
कार्रवाई का स्थान: कानपुर, उत्तर प्रदेश का महाराजपुर क्षेत्र (हाईवे किनारा)।
हटाए गए अतिक्रमण: करीब 36 अवैध निर्माण और दुकानें।
अधिकारी दल: NHAI के इंसिडेंट इंचार्ज अतुल शर्मा, रूट पेट्रोलिंग अधिकारी शैलेंद्र शर्मा और हाईवे पुलिस चौकी प्रभारी पवन शर्मा की देखरेख में यह कार्रवाई हुई।
देशव्यापी अभियान का हिस्सा
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उन कड़े निर्देशों के तहत की जा रही है जिसमें हाईवे को (जोखिम का गलियारा) बनने से रोकने और अवैध ढाबों व व्यावसायिक निर्माणों को हटाने का आदेश दिया गया है।
इसी क्रम में NHAI पूरे देश में बड़े स्तर पर अभियान चला रहा है:
देश भर में अब तक 361 से अधिक अवैध पहुंच मार्ग और अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं।
हादसों को न्यौता देने वाले 150 अवैध मीडियन कट को स्थाई रूप से बंद कर दिया गया है।
राजमार्गों पर अवैध रूप से बने ढाबों, होटलों और अनधिकृत संरचनाओं के खिलाफ 1,403 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं।
सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता साफ रखने के उद्देश्य से NHAI का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक भूमि, फुटपाथ और राष्ट्रीय राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने और निजी संपत्तियों पर होने वाली एकतरफा बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कड़े और स्पष्ट नियम तय किए हैं। अदालत का स्पष्ट मानना है कि कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी नागरिक को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के बेदखल नहीं किया जा सकता।
न्यायालय द्वारा जारी की गई प्रमुख गाइडलाइंस निम्नलिखित हैं:
1. सार्वजनिक स्थलों और राजमार्गों पर कड़ा रुखसार्वजनिक सुरक्षा प्राथमिकता: Supreme Court के अनुसार सार्वजनिक सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। सड़क, फुटपाथ, जल निकायों (नदियों/तालाबों) या रेलवे ट्रैक पर बाधा डालने वाले किसी भी ढांचे को हटाया जाना अनिवार्य है।
धार्मिक स्थलों पर समान नियम: सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण करने वाला ढांचा चाहे मंदिर, दरगाह, गुरुद्वारा या मस्जिद हो, उसे हटाया जाएगा। इसमें धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग (Highways): राष्ट्रीय राजमार्गों के ‘राइट ऑफ वे’ (Right of Way) के भीतर किसी भी नए ढाबे या व्यावसायिक निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध है। कोर्ट ने हाईवे को ‘corridors of peril’ (जोखिम का गलियारा) बनने से रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और तत्काल अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है।
2. अवैध निर्माण और बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ अखिल भारतीय नियम
नवंबर 2024 के अपने ऐतिहासिक फैसले (In Re: Directions in the Matter of Demolition of Structures) में सुप्रीम कोर्ट ने मनमानी बुलडोजर कार्रवाई को रोकने के लिए देशव्यापी नियम तय किए हैं:
सजा के तौर पर विध्वंस नहीं: कोई भी राज्य सरकार किसी व्यक्ति के आपराधिक मामले में केवल ‘आरोपी या दोषी’ होने के आधार पर उसकी संपत्ति को नहीं ढहा सकती। संपत्ति गिराने का अधिकार सिर्फ नागरिक/नगर पालिका नियमों के उल्लंघन (अवैध निर्माण) पर ही है।
15 दिन का पूर्व नोटिस अनिवार्य: किसी भी निर्माण को ढहाने से पहले मालिक या रहने वाले व्यक्ति को कम से कम 15 दिन पहले लिखित कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) देना होगा।
नोटिस की तामील और पारदर्शिता: नोटिस मालिक को व्यक्तिगत रूप से (दो गवाहों की मौजूदगी में) देना होगा, पंजीकृत डाक से भेजना होगा और संबंधित स्थानीय निकाय (Municipal Authority) के डिजिटल पोर्टल पर भी अपलोड करना होगा।
व्यक्तिगत सुनवाई: नोटिस के बाद प्रभावित पक्ष को अपनी बात रखने और दस्तावेज पेश करने का पूरा अवसर दिया जाना अनिवार्य है।
अंतिम आदेश के बाद 15 दिन की मोहलत: यदि प्राधिकरण सुनवाई के बाद भी संपत्ति गिराने का अंतिम आदेश पास करता है, तो उसे लागू करने से पहले 15 दिन का अतिरिक्त समय देना होगा। यह समय इसलिए दिया जाता है ताकि पीड़ित व्यक्ति अदालत से स्टे (Stay) ले सके या अपना सामान हटा सके।
पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी: अतिक्रमण या अवैध निर्माण हटाने की पूरी कार्रवाई की अनिवार्य रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग (Videography) की जाएगी और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
3. अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही
यदि कोई अधिकारी सुप्रीम कोर्ट की इन गाइडलाइंस का उल्लंघन कर बिना नोटिस या तय प्रक्रिया का पालन किए किसी का घर या दुकान गिराता है, तो उसके खिलाफ कंटेंप्ट (अवमानना) और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। नुकसान की भरपाई (Restitution) और मुआवजा भी दोषी अधिकारी की जेब या वेतन से वसूल किया जाएगा।

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