अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में अनिश्चितता
विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से लगभग $16.5 बिलियन निकाले अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 93 पैसे की गिरावट दर्शाता है।
कानपुर 22 नवंबर 2025
नई दिल्ली:22 नवंबर 2025: भारतीय रुपये की यह चाल पूरी तरह से राजनीतिक और आर्थिक है। भविष्य में रुपये की स्थिति और अधिक कमजोर हो सकती है अगर भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं और सेंट्रल बैंक की नीतियों में कोई बदलाव नहीं होता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपये की विनिमय दर 90.40 और 91 के स्तर तक जा सकती है।
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक का सबसे निचला स्तर 89.61 के स्तर पर पहुँचा है। यह गिरावट दो मुख्य कारणों से उत्पन्न हुई है: एक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद में कमी और दूसरी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में अनिश्चितता। गिरावट का विश्लेषण इस प्रकार है ।
व्यापार संबंधी अनिश्चितताएँ: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में विलंब ने बाजार में नकारात्मक सेंटिमेंट को बढ़ाया है। यह इस तथ्य से भी प्रभावित हो रहा है कि अमेरिका ने भारतीय निर्यातों पर भारी टैरिफ लागू किए हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है।
विदेशी निवेश का फ्लो: इस वर्ष विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से लगभग $16.5 बिलियन निकाल लिए हैं। इससे रुपये की स्थिति कमजोर हुई है, और इसे एशिया की सबसे कमजोरी मुद्रा में से एक बना दिया है।
बाजार का मूड: वैश्विक IT शेयरों की भारी बिकवाली और घरेलू शेयर बाजारों में नकारात्मक रुझान ने भी रुपये की स्थिति को कमजोर किया है। व्यापारियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप भी कम हो गया है, जिससे रुपये की स्थिति पर अधिक दबाव पड़ा है।
महत्वपूर्ण आंकड़े: अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 88.67 पर खुला और आगे के कारोबार में यह 89.65 तक गिर गया, और अंततः 89.61 पर बंद हुआ, जो पिछले दिन की तुलना में 93 पैसे की गिरावट दर्शाता है।










