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भारतीय वायुसेना का तेजस जेट दुबई एयर शो में गंभीर दुर्घटना का शिकार: पायलट की मौत और गंभीर नुकसान

घटना 21 नवंबर 2025 को दोपहर करीब 2:10 बजे घटी
तेजस विमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित
भारतीय वायुसेना ने हादसे की जांच के लिए एक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित
लागत लगभग 680 करोड़ रुपये
कानपुर 21 नवंबर 2025
दुबई:21 नवंबर 2025:
भारतीय वायुसेना का तेजस जेट दुबई एयर शो में एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गया। यह घटना 21 नवंबर 2025 को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 2:10 बजे घटी जब तेजस विमान एक प्रदर्शन उड़ान के दौरान अचानक अनियंत्रित होकर जमीन पर गिर गया, जिससे पायलट की मौत हो गई.
दुर्घटना ने एक गंभीर सुराग दिया है, जहाँ विमान जमीन पर गिरते ही जोरदार धमाका हुआ और काला धुआं उठने लगा, जिससे भीड़ में अफरा-तफरी मच गई। एयर शो में उपस्थित दर्शकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे जो इस दुर्घटना के गवाह बने. घटना की रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने आपातकालीन पहुँच प्राप्त की और आग बुझाने में सफल रहे.
भारतीय वायुसेना ने हादसे की जांच के लिए एक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित कर दी है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि यह एक हादसा था या फिर इसके पीछे कोई साजिश हो सकती है. तेजस विमान, जो कि हल्का लड़ाकू विमान (LCA) है, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित किया गया है, और इसकी लागत लगभग 680 करोड़ रुपये प्रति विमान बताई जा रही है.
भारतीय वायुसेना और भारतीय रक्षा उद्योग पर इस घटना ने व्यापक प्रभाव डाल कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। हादसे में पायलट की मौत एक त्वरित और गंभीर नुकसान है, और भारतीय वायुसेना शोक व्यक्त कर रही है तथा पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है.
भारतीय वायुसेना द्वारा जांच प्रक्रिया में विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य सुरक्षा की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को सुनिश्चित करना है। हाल ही में, एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 की दुर्घटना ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया, जिसमें जांच में देरी और पारदर्शिता की कमी शामिल है, जिससे विमानन सुरक्षा निगरानी में खामियों की पहचान हुई।
प्रमुख कदम और प्रक्रियाएँ:
दुर्घटना की प्रारंभिक रिपोर्टिंग: एयर इंडिया AI 171 की दुर्घटना के संदर्भ में, पहला उड़ान रिकॉर्डर 13 जून, 2025 को बरामद किया गया था, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट लगभग एक महीने बाद जारी हुई। इस देरी ने जांच प्रक्रिया की गति और गहराई पर प्रश्न उठाए।
प्रस्तावित सुधारा: विभिन्न विश्लेषकों और अधिकारियों द्वारा जांच प्रक्रिया में सुधार के लिए सुझाव दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचा जा सके। यह सुधार वैश्विक मानकों के अनुरूप होगा और प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ाने पर केंद्रित होगा।
साक्षात्कार और परीक्षण: दुर्घटनाओं की जांच के लिए प्रीक्रिया साक्षात्कार और उसके बाद तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी संभावित पहलुओं का समुचित मूल्यांकन किया जा सके।
जनता को जानकारी देना: जनहित में, जांच से संबंधित विवरणों और निष्कर्षों को समय पर साझा करने की आवश्यकता है। इससे न केवल संबंधित पक्षों का विश्वास बढ़ता है, बल्कि पारदर्शिता को भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
विमानन सुरक्षा आज के मानकों के अनुकूल: भारतीय वायुसेना ने यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना शुरू किया है कि उसके जांच प्रक्रियाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों। इससे न केवल तकनीकी बल्कि मानव त्रुटियों से संबंधित मुद्दों को भी हल किया जा सकेगा।
भारतीय वायुसेना द्वारा उठाए गए ये कदम सुनिश्चित करते हैं कि जांच में गहराई और पारदर्शिता को बढ़ावा मिले, ताकि भविष्य में सुरक्षा संबंधी घटनाएँ घटित होने पर प्रभावी उपाय किए जा सकें।

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