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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 47 मिलकर नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी आधार

सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार में बेहतर स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल
पोषण, जीवन स्तर को  उठाना और  स्वास्थ्य में सुधार राज्य के प्राथमिक कर्तव्यों में से एक
कानपुर: 13 सितम्बर 2026
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 47 मिलकर देश के नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी आधार तैयार करते हैं । न्यायालयों ने कई ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट किया है कि सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार में बेहतर स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है ।
इन दोनों अनुच्छेदों का मुख्य महत्व इस प्रकार है:
अनुच्छेद 21 (Right to Life): यह एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना वंचित नहीं किया जा सकता । सर्वोच्च न्यायालय ने व्याख्या की है कि ‘जीवन’ का अर्थ केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और गरिमापूर्ण जीवन जीना है ।
अनुच्छेद 47 (Duty of the State): यह राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) का हिस्सा है । यह स्पष्ट रूप से कहता है कि लोगों के पोषण स्तर (Nutrition level), जीवन स्तर को ऊपर उठाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) में सुधार करना राज्य के प्राथमिक कर्तव्यों में से एक होगा
न्यायालय इन दोनों अनुच्छेदों को एक साथ जोड़कर देखता है, तो स्वास्थ्य का अधिकार सीधे तौर पर सरकार की अनिवार्य कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी बन जाता है ।

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