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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार: दुनिया में चौथे स्थान पर: $785.7 बिलियन

ऑल-टाइम हाई (सर्वोच्च स्तर) पर
भारत ने रूस को पीछे छोड़ चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार धारक का गौरव हासिल कर लिया
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रवासी भारतीयों को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई
विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) रियायती स्वैप योजना के कारण देश में भारी डॉलर इनफ्लो हुआ।
कानपुर: 15 सितम्बर 2026
मुंबई: 15 सितम्बर 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $44.903 बिलियन की ऐतिहासिक साप्ताहिक बढ़ोतरी के साथ $785.706 बिलियन के नए ऑल-टाइम हाई (सर्वोच्च स्तर) पर पहुंच गया है। इस अभूतपूर्व उछाल के साथ भारत ने रूस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया में चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार धारक देश बनने का गौरव हासिल कर लिया है।
वैश्विक स्तर पर देशों की स्थिति
इस नई बढ़त के बाद, भारत अब दुनिया के शीर्ष देशों की विशिष्ट कतार में शामिल हो गया है

रैंक           देश विदेशी मुद्रा भंडार (अनुमानित)
1           चीन                     $3.4+ ट्रिलियन
2          जापान                     $1.2+ ट्रिलियन
3         स्विट्जरलैंड                     $1.09+ ट्रिलियन
4        भारत                     $785.7 बिलियन
5         रूस                     $753.5 बिलियन

विदेशी मुद्रा संपत्तियों (FCA) में भारी वृद्धि: भंडार के सबसे बड़े घटक, यानी फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में अकेले इस सप्ताह $47.5 बिलियन की भारी वृद्धि हुई, जिसने कुल आंकड़े को $648.2 बिलियन तक पहुंचा दिया।
सोने के भंडार में मामूली गिरावट: जहाँ एक तरफ विदेशी मुद्रा आस्तियां बढ़ीं, वहीं सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण स्वर्ण भंडार का मूल्य लगभग $2.6 बिलियन घटकर $113.8 बिलियन रह गया, जिसने इस बढ़त को आंशिक रूप से संतुलित किया।
भारत के लिए इसके मायने और चिंताएंआर्थिक सुरक्षा कवच: इतना बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को वैश्विक झटकों, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय रुपये (INR) को स्थिर रखने के लिए मजबूत वित्तीय फायरपावर (firepower) प्रदान करता है।
भावी देनदारियां: बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस भंडार का एक बड़ा हिस्सा NRI जमा (Deposits) के रूप में आया है, जो तकनीकी रूप से बैंकों की भविष्य की देनदारियां (Future Liabilities) हैं और इन्हें ब्याज सहित वापस लौटाना होगा। इसलिए इसे पूरी तरह से शुद्ध राष्ट्रीय संपत्ति नहीं माना जा सकता, हालांकि यह लिक्विडिटी के लिहाज से एक बेहतरीन सुरक्षा कवच है।
एतिहासिक उछाल के प्रमुख कारणFCNR(B) डिपॉजिट स्कीम का कमाल: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रवासी भारतीयों (NRIs) को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) [FCNR-B] रियायती स्वैप योजना के कारण देश में भारी डॉलर इनफ्लो हुआ। इस योजना के तहत अगस्त के अंत तक लगभग $127 बिलियन से अधिक का नॉन-रेसिडेंट डिपॉजिट जुटाया गया।

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