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माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय: उत्तर प्रदेश शिक्षामित्रों के नियमितीकरण की मांग: अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी

सभी 420+ याचिकाकर्ताओं को आदेश कि वे 3 सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत प्रत्यावेदन प्रस्तुत करें।
याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों और उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।
संबंधित प्राधिकारी को कानून के दायरे में रहकर निश्चित समयावधि के भीतर विचार अंतिम निर्णय लेना होगा।
कानपुर: 2 अगस्त 2026
इलाहाबाद :2 अगस्त 2026

माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एकल पीठ (न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान) ने अवधेश कुमार व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य (Writ-A No. 5469/2026) मामले में उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के नियमितीकरण की मांग पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
इस निर्णय और अदालती आदेश से जुड़े मुख्य बिंदु और दिशा-निर्देश निम्नलिखित हैं:
न्यायालय का मुख्य आदेश और दिशा-निर्देशप्रत्यावेदन प्रस्तुत करना: कोर्ट ने सभी 420+ याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया है कि वे 3 सप्ताह के भीतर अपना एक विस्तृत प्रत्यावेदन (Representation) अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा (उत्तर प्रदेश) के समक्ष प्रस्तुत करें।
सरकार को विचार करने का निर्देश: माननीय न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों और उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।
समयबद्ध निस्तारण: संबंधित प्राधिकारी को याचिकाकर्ताओं द्वारा सौंपे गए इस प्रत्यावेदन पर कानून के दायरे में रहकर एक निश्चित समयावधि के भीतर विचार करना होगा और उस पर अंतिम निर्णय लेना होगा।
पूर्व ऐतिहासिक निर्णयों का संदर्भ
सुनवाई के दौरान नियमितीकरण और विलोपन  के कानूनी सिद्धांतों को पुख्ता करने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े पूर्व फैसलों का प्रमुखता से हवाला दिया गया:

Jaggo बनाम भारत संघ: यह मामला अस्थायी या संविदा कर्मियों के दीर्घकालिक सेवा के आधार पर नियमितीकरण के अधिकारों और प्रक्रिया को स्पष्ट करता है।

Shripal बनाम नगर निगम गाज़ियाबाद: इस निर्णय के जरिए समान कार्य के लिए उचित सेवा शर्तों और नीतिगत नियमितीकरण के दायित्वों पर प्रकाश डाला गया है।
शिक्षामित्रों के लिए वर्तमान स्थिति
आदेश उन शिक्षामित्रों के लिए एक सकारात्मक कदम है जो प्राथमिक विद्यालयों में लंबे समय से संविदा पर कार्य कर रहे हैं और सहायक अध्यापक के रूप में स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। कोर्ट ने सीधे नियमितीकरण का आदेश देने के बजाय, सरकार को इस पर नीतिगत और कानूनी तौर पर विचार करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

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