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मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर : रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण देश पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक

यूनिवर्सिटी के कुल 40 भवनों में से 38 भवनों का निर्माण बिना स्वीकृत मानचित्र (नक्शे)
ध्वस्तीकरण आदेश के बाद से पढ़ रहे लगभग 3,000 छात्रों का भविष्य दांव पर
विरोध में छात्र लगातार परिसर के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरने पर
कानपुर: 27 जुलाई 2026
मुरादाबाद: 27 जुलाई 2026
मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण (बुलडोजर कार्रवाई) के आदेश पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है।
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के आदेश के खिलाफ जौहर ट्रस्ट ने कमिश्नर कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए यह बड़ी राहत दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम और विवाद
RDA का मूल आदेश: रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) और जिला प्रशासन ने 15 जुलाई 2026 को एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि यूनिवर्सिटी के कुल 40 भवनों में से 38 भवनों का निर्माण बिना स्वीकृत मानचित्र (नक्शे) के किया गया है।
खुद गिराने की मिली थी मोहलत: प्रशासन ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को 15 से 20 दिनों का समय दिया था कि वे इन अवैध घोषित 38 भवनों को खुद ध्वस्त कर लें, अन्यथा प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई करेगा।
स्टे (रोक) लगने का कारण: मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट में इस मामले की नियमित सुनवाई 28 जुलाई 2026 को तय थी। हालांकि, शोक अवकाश (हड़ताल) होने के कारण यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने एक प्रार्थना पत्र देकर अंतरिम राहत की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए कमिश्नर ने अगली सुनवाई तक ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है।
छात्रों का विरोध: इस ध्वस्तीकरण आदेश के बाद से यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे लगभग 3,000 छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ था, जिसके विरोध में छात्र लगातार परिसर के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने इस प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई ‘उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973’ के नियमों के तहत की गई है। फिलहाल, कमिश्नर कोर्ट के इस फैसले से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को अस्थाई रूप से बड़ी राहत मिल गई है
यूपी नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 शहरी विकास के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जिसमें मास्टर योजनाओं और क्षेत्रीय विकास योजनाओं के निर्माण की प्रक्रिया शामिल है।अधिनियम का उद्देश्य
यूपी नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों के सुनियोजित विकास को सुनिश्चित करना है। यह अधिनियम शहरी विकास प्राधिकरणों को विभिन्न शक्तियाँ प्रदान करता है, जैसे कि:
सर्वेक्षण और मास्टर योजनाएँ: शहरी विकास के लिए सर्वेक्षण करना और मास्टर योजनाएँ तैयार करना।
भूमि अधिग्रहण: आवश्यकतानुसार भूमि का अधिग्रहण करना और उसे विकसित करना।
विकास नियमावली: भूमि उपयोग, जनसंख्या घनत्व, और विकास के लिए नियमों का निर्धारण करना।प्रमुख धाराएँ
धारा 9: विकास क्षेत्र के लिए मास्टर योजना का निर्माण।
धारा 10: क्षेत्रीय विकास योजनाओं का निर्माण।
धारा 17: भूमि का अनिवार्य अधिग्रहण।
धारा 26: नियमों का उल्लंघन करने पर दंड।
शहरी स्थानीय निकाय
उत्तर प्रदेश में 762 शहरी स्थानीय निकाय हैं, जिनमें नगर निगम, नगर पालिका परिषद, और नगर पंचायत शामिल हैं। इन निकायों का कर्तव्य है कि वे निवासियों को मूलभूत नागरिक सुविधाएँ प्रदान करें, जैसे कि स्वच्छ पेयजल, सड़कें, जल निकासी, और सफाई व्यवस्था
इस अधिनियम के माध्यम से, उत्तर प्रदेश में शहरी विकास को सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है, जिससे शहरीकरण की चुनौतियों का सामना किया जा सके।

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