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मेरठ किसान नेताओं की बर्बर पिटाई और फिल्मी गाने पर जबरन नचवाने के मामले में तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और इंस्पेक्टर समेत 9 पुलिसकर्मियों को नोटिस

संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग में हड़कंप
जांच तेज गति से आगे बढ़ रही है।
19 अगस्त को जब वे अपनी बात रखने एसएसपी कार्यालय गए, तो वहां उनके साथ मारपीट
मारपीट के कारण किसान नेता दिग्विजय भाटी की आंख पर गंभीर चोट  और चेहरा सूज गया।
कानपुर:23 अगस्त 2026
मेरठ:23 अगस्त 2026
मेरठ में किसान नेताओं की बर्बर पिटाई और फिल्मी गाने पर जबरन नचवाने के मामले में तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और इंस्पेक्टर समेत 9 पुलिसकर्मियों को आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया गया है। इस बेहद संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और जांच तेज गति से आगे बढ़ रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य बिंदु और अब तक की गई कार्रवाइयां इस प्रकार हैं:
 घटना और मुख्य आरोपथर्ड डिग्री का आरोप: भारतीय किसान यूनियन (BR अंबेडकर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भाटी और मेरठ जिला अध्यक्ष मोहित जाटव ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
फिल्मी गाने पर नचवाया: पीड़ित नेताओं का आरोप है कि 19 अगस्त को जब वे अपनी बात रखने एसएसपी कार्यालय गए, तो वहां उनके साथ मारपीट की गई। बाद में एसओजी (SOG) कार्यालय में उनके हाथ-पैर बांधकर लाठियों से पीटा गया और मोबाइल पर “चोली के पीछे क्या है” गाना बजाकर उन्हें जबरन नचाया गया।
गंभीर चोटें: मारपीट के कारण किसान नेता दिग्विजय भाटी की आंख पर गंभीर चोट आई है और चेहरा पूरी तरह सूज गया।
अब तक हुआ बड़ा एक्शन एसएसपी का ट्रांसफर: मामले के तूल पकड़ते ही शासन ने मेरठ के तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय को पद से हटाकर लखनऊ डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध (अटैच) कर दिया है।
8 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर: मेरठ के नए एसएसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति ने सिविल लाइंस थाना प्रभारी (SHO) अखिलेश कुमार गौड़ समेत 8 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। [12]
9 को नोटिस: मेरठ ज़ोन के एडीजी (ADG) भानु भास्कर के निर्देश पर अब पूर्व एसएसपी और इंस्पेक्टर समेत सभी 9 आरोपी पुलिसकर्मियों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। [12]
निष्पक्ष जांच के आदेश
मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मेरठ पुलिस के बजाय इसकी विस्तृत और प्रारंभिक जांच सहारनपुर रेंज के डीआईजी (DIG) अभिषेक सिंह को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ मुकदमा (FIR) भी दर्ज हो सकता है, जिसकी मांग विपक्षी दल (सपा) और किसान संगठन लगातार कर रहे हैं।

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