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राजीव शुक्ला कांग्रेस, राज्यसभा सांसद तथा BCCI उपाध्यक्ष का नरेंद्र मोदी का पहला टीवी साक्षात्कार “रूबरू” (Ru Ba Ru) कार्यक्रम में

– ANI पॉडकास्ट में नरेंद्र मोदी की शुरुआती कार्यशैली और राजनीतिक सफर के बारे में साझा
– मोदी ने 1990 दशक में छोटे कंप्यूटर के साथ साक्षात्कार किया, तकनीकी जागरूकता को दर्शाता
– मोदी ने चुनावी राजनीति में नहीं बल्कि संगठनात्मक काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
– मोदी को “बड़ी शख्सियत” माना, नहीं सोचा कि गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनेंगे।
– मोदी की दूरदर्शिता और अनुशासन उनके “डिजिटल इंडिया” जैसे विजन में भी दिखाई देती है,
– प्रारंभिक कार्यशैली का संकेत
कानपुर: 06 फरवरी2026
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने ANI पॉडकास्ट में नरेंद्र मोदी के प्रारंभिक राजनीतिक सफर की एक दिलचस्प कहानी साझा की। शुक्ला ने बताया कि मोदी का यह संभवतः पहला टीवी इंटरव्यू था, जब वे भाजपा के महासचिव थे और उन्होंने अपने साथ एक छोटा कंप्यूटर लाया था, जो उनकी तकनीकी जागरूकता को दर्शाता है। उस समय मोदी ने चुनावी राजनीति में नहीं जाने और संगठनात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने की इच्छा व्यक्त की थी। हालांकि, परिस्थितियों ने उन्हें गुजरात भेजा, जहाँ से उनका राजनीतिक करियर आगे बढ़ा। शुक्ला ने कहा कि वे मोदी को एक “बड़ी शख्सियत” मानते थे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनेंगे। इस किस्से से मोदी की दूरदर्शिता और अनुशासन का पता चलता है, जो उनके “डिजिटल इंडिया” जैसे विजन में भी नजर आया। शुक्ला की यादें इस बात का प्रमाण हैं कि कैसे छोटे-छोटे संकेत किसी नेता की भविष्य की सफलता को दर्शा सकते हैं।
मुख्य बिंदु
पहली मुलाकात और इंटरव्यू
अरुण जेटली के आवास पर “रूबरू” कार्यक्रम के लिए नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू हुआ।
यह संभवतः मोदी का पहला टीवी इंटरव्यू था, जब वे भाजपा  के महासचिव थे।
तकनीकी जागरूकता
मोदी अपने साथ एक छोटा कंप्यूटर (लैपटॉप जैसा पोर्टेबल डिवाइस) लेकर आए थे।
उस दौर (1990s–2000s) में यह असामान्य था और उनकी तकनीकी तैयारी व दूरदर्शिता को दिखाता है
संगठनात्मक दृष्टिकोण
इंटरव्यू में मोदी ने कहा कि उन्हें चुनावी राजनीति में रुचि नहीं है।
वे संगठन को मजबूत करने और राज्यों में पार्टी का विस्तार करने पर ध्यान देना चाहते थे।
खुद को उन्होंने “संगठन का व्यक्ति” बताया।
राजनीतिक सफर का मोड़
परिस्थितियों ने उन्हें गुजरात भेजा, जहाँ से उनका राजनीतिक करियर आगे बढ़ा।
2001 में वे मुख्यमंत्री बने और 2014 से प्रधानमंत्री हैं।
शुक्ला की दृष्टि
उन्होंने मोदी को उस समय भी “बड़ी शख्सियत” माना, लेकिन भविष्य की ऊँचाइयों का अंदाजा नहीं था। यह यादें दिखाती हैं कि कैसे शुरुआती अनुशासन, तकनीकी रुचि और संगठनात्मक सोच आगे चलकर बड़े विज़न में बदलती हैं।
व्यापक महत्व
यह बताता है कि नेतृत्व की असली पहचान छोटी-छोटी बातों में छिपी होती है—जैसे तकनीक का उपयोग, अनुशासन और संगठन पर ध्यान।
बाद में यही गुण मोदी के “डिजिटल इंडिया” और संगठनात्मक रणनीतियों में दिखाई दिए।
राजनीतिक विरोधी होने के बावजूद शुक्ला ने सम्मानजनक अंदाज में यह अनुभव साझा किया, जो लोकतांत्रिक संस्कृति की परिपक्वता को भी दर्शाता है।
”नरेंद्र मोदी ने 1995 से भाजपा के राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य किया और हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में पार्टी की गतिविधियों की देखरेख की।सितंबर 2001 में, उन्हें तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जो कि भाजपा के सह-संस्थापक थे, का फोन आया और अक्टूबर में केशुभाई पटेल के स्थान पर उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया। वह मई 2014 तक इस पद पर रहे, जब उन्हें प्रधान मंत्री चुना गया, वह इस पद पर अब भी कायम हैं।

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