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लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा :गीत नहीं है भारतीयता का प्रतीक

वंदे मातरम गीत नहीं है, बल्कि भारतीयता का प्रतीक
“सत्ता पक्ष इतना घमंडी हो गया है कि खुद को स्वतंत्रता सेनानियों से भी ऊपर रख लिया है
वन्दे मातरम् को सबसे पहले कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था
कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मोदी को “मास्टर डिस्टॉरियन” करार दिया
महबूबा मुफ्ती पीडीपी नेता ने भाजपा की आलोचना की और इसे “खोखली प्रतीकात्मकता” कहा
News24@news24tvchannel·3h
“सत्ता पक्ष इतना घमंडी हो गया है कि उसने खुद को स्वतंत्रता सेनानियों से भी ऊपर रख लिया है” ◆ कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने लोकसभा में कहा
कांग्रेस के अधिवेशनों में वंदे मातरम गाया जाता है, क्या आपके अधिवेशनों में गाया जाता है?” ◆ कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने लोकसभा में कहा
NBT Hindi News@NavbharatTimes·1h
कांग्रेस के हर एक अधिवेशन में ‘वंदे मातरम’ गाया जाता है, आपके अधिवेशनों में गाया जाता है या नहीं? लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सत्ता पक्ष से पूछा सवाल, कहा- “कांग्रेस के हर एक अधिवेशन में ‘वंदे मातरम’ गाया जाता है, आपके अधिवेशनों में गाया जाता है या नहीं?”
News24@news24tvchannel·3h
“हमारा राष्ट्रगीत है, इस पर बहस की क्या ज़रूरत है” ◆ कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा
Jaivardhan Singh@JVSinghINC·41m
प्रियंका गांधी जी की ये लाइन ने ही वंदे मातरम चर्चा में भाजपा का सफाया कर दिया!
अपूर्व اپوروا Apurva Bhardwaj46m
प्रियंका गांधी ने आज धो डाला है… गोडसे की गुलामों को… अंग्रेजों के नौकरों को… उन शाखा-भक्तों को… •••• जो आज भी शाखाओं में बैठकर “नमस्ते सदा वत्सले” गाते फिरते हैं… •••• जो कभी रविन्द्र नाथ टैगोर को वामपंथी बताते थे… •••• और मज़े की बात— जिस वन्दे मातरम् को सबसे पहले कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था… उसी पर आज माफ़ीवीर के चमचे ज्ञान बाँट रहे हैं… ••••• सुनो… गोडसे के गुलामों… ये देश कांग्रेस की विचारधारा से ही चला है… चलता है… और चलता ही रहेगा… ••••• जिन्होंने तिरंगा नहीं माना… जिन्होंने वंदे मातरम् को नहीं स्वीकारा… अगर वही आज राष्ट्रवाद सिखाएँ… तो उन पर हँसी नहीं… सीधी दया आती है… •••••

‘वंदे मातरम’ पर हाल ही में हुई लोकसभा की बहस केंद्र में रही, जिसका मुख्य उद्देश्य इस प्रतिष्ठित गीत की 150वीं वर्षगांठ मनाना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए, जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम को “टुकड़ों में तोड़ा” है और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे संस्थापकों का अपमान किया है।
कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मोदी को “मास्टर डिस्टॉरियन” करार दिया और माफी की मांग की। कांग्रेस के सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि वंदे मातरम पर बहस के माध्यम से सरकार देश की असली समस्याओं, जैसे बेरोजगारी और महंगाई, से ध्यान भटकाना चाहती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मोदी नेहरू द्वारा की गई गलतियों की सूची बनाएं और उस पर चर्चा करें।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बहस में भाग लेते हुए कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारतीयता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इसे खंडित करने का निर्णय लिया था।
महबूबा मुफ्ती, पीडीपी की नेता, ने भाजपा की आलोचना की और इसे “खोखली प्रतीकात्मकता” करार दिया, यह बताते हुए कि उन्होंने वास्तविक मुद्दों को अनदेखा किया है जैसे कि इंडिगो संकट। मोदी ने इस अवसर पर वंदे मातरम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का पवित्र मंत्र रहा है और इसके साथ ऐतिहासिक अन्याय किया गया है।
वंदे मातरम पर हुई इस बहस ने न केवल गीत की ऐतिहासिकता को पुनर्जीवित करने का काम किया, बल्कि राजनीतिक द्वंद्व के एक नए अध्याय की शुरुआत भी की, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप और विचारधाराओं की टकराहट स्पष्ट रूप से देखी गई।

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