Home » कानपुर समाचार » सुनीता तिवारी जी की सोशल मीडिया पोस्ट से : आदरणीय श्री सुरेश तिवारी जी द्वारा प्रदत्त गीत का मुखड़ा “बरसो घनश्याम इसी वन में मेरे मन के वृंदावन में ।

सुनीता तिवारी जी की सोशल मीडिया पोस्ट से : आदरणीय श्री सुरेश तिवारी जी द्वारा प्रदत्त गीत का मुखड़ा “बरसो घनश्याम इसी वन में मेरे मन के वृंदावन में ।

सुनीता तिवारी जी कानपुर के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक हलकों की सम्मानित और सक्रिय कवयित्री व मार्गदर्शक
स्वयं काव्य पाठ के साथ वरिष्ठ कवयित्रियों से समन्वय बिठाकर गोष्ठी को सफल बनाती हैं।
सुनीता तिवारी जी की सोशल मीडिया पोस्ट से
कानपुर: 30 जुलाई 2026
सुनीता तिवारी जी : एक परिचय
सुनीता तिवारी जी कानपुर के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक हलकों की एक बेहद सम्मानित और सक्रिय कवयित्री व मार्गदर्शक हैं।काव्य शैली: सुनीता जी की लेखनी में गहरी संवेदनशीलता, समय के साथ बदलते मानवीय रिश्ते, सामाजिक चेतना और आध्यात्मिक भाव देखने को मिलते हैं।
विशेष पहचान: वे मंचों पर अपनी सुमधुर आवाज़ में “वाणी वंदना” (सरस्वती वंदना) और मधुर गीतों की प्रस्तुति के लिए विशेष रूप से जानी जाती हैं।
भूमिका: कानपुर महिला साहित्यिक मंच व अन्य सहयोगी संस्थाओं (जैसे साहित्यकार सहयोग संगठन) के साथ मिलकर वे न केवल स्वयं काव्य पाठ करती हैं, बल्कि वरिष्ठ कवयित्रियों के साथ समन्वय बिठाकर हर गोष्ठी को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कानपुर महिला साहित्यिक मंच शब्दों और भावनाओं का सुंदर गुलदस्ता है, तो सुनीता तिवारी जी उसकी वह महक हैं जो अपनी सरलता और कुशल नेतृत्व से पूरे साहित्यिक परिवेश को सुवासित रखती हैं।
Sunita Tiwari hrs प्रस्तुत है एक गीत का
(आदरणीय श्री सुरेश तिवारी जी द्वारा प्रदत्त गीत का
मुखड़ा “बरसो घनश्याम इसी वन में)

एक प्रयास 🙏🙏
बरसो घनश्याम,इसी वन में
मेरे मन के वृंदावन में ।
बरसो घनश्याम इसी वन में।
मन व्याकुल , तेरे दर्शन को
तन आकुल , तेरे परसन‌ को
कुछ ठौर नही इस भटकन में।
बरसो घनश्याम इसी वन में्््
कुॅंजों में रास रचाऊॅंगी
राधे सॅंग तुम्हें नचाऊॅंगी
सुख मिलै श्याम उस नर्तन में ।
बरसो घनश्याम इसी वन में्््
हिय बीच हिंडोला डालूॅंगी
श्यामा अरु श्याम झुलाऊॅंगी
रस बरसेगा उर ॴॅंगन में ।
बरसो घनश्याम इसी वन ्््
रस बरस रह्यो बरसानें में
मैं विकल बहुत हूॅं आनें मे
रस बरसा दो, हृदयाॅंगन में ।
बरसो घनश्याम इसी वन में््
कुछ ऐसा कर दो श्याम पिया
जित देखूॅं, तू बस दिखे पिया
छवि देखूॅं दिल के दरपन में ।
बरसो घनश्याम इसी वन में ्
मन भ्रंग माधुरी छकै जिया
द्रग रूप राशि छवि तकै पिया
चंचल तिरछी तव चितवन में।
बरसो घनश्याम इसी वन में ् ्
©सुनीता तिवारी कानपुर ✍️

Share This

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

Recent Post