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सुप्रीम कोर्ट: दिल्ली 20 जुलाई 2026 छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन इस्तेमाल पर बेहद गंभीर

केंद्र सरकार और 7 राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा
पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन  इस्तेमाल  गंभीर
देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की दंदात्मक या जबरन कार्रवाई पर तुरंत रोक
सीसीटीवी , ड्रोन, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और पीसीआर लॉग  को सुरक्षित रखें.
कानपुर: 28 जुलाई 2026
नई दिल्ली: 28 जुलाई 2026

सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल पर बेहद गंभीर रुख अपनाया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और 7 राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की दंदात्मक या जबरन कार्रवाई पर तुरंत रोक लगा दी है.
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश
न्यायालय ने पुलिस कार्रवाई और नागरिकों के अधिकारों को लेकर निम्नलिखित अहम आदेश दिए हैं:पैलेट गन पर सवाल: कोर्ट ने भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल और गंभीर रूप से घायल प्रदर्शनकारियों, वकीलों तथा मीडिया कर्मियों पर हुए हमलों को गंभीर माना.
नाबालिगों की फौरन रिहाई: 18 साल से कम उम्र के जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया है.
डिजिटल सबूतों की सुरक्षा: सभी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और पीसीआर लॉग जैसे सबूतों को सुरक्षित रखें.
स्वतंत्र जांच के संकेत: कोर्ट ने पुलिस ज्यादती के आरोपों की एक स्वतंत्र जांच कराने के संकेत भी दिए हैं.
याचिकाकर्ताओं और कानून की दलीलें
यह सुनवाई पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और पैलेट गन से घायल हुए दो पीड़ितों द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर हुई। याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

कानून का उल्लंघन: याचिकाकर्ताओं के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 148 के तहत भीड़ को हटाने के लिए एक तय प्रक्रिया (पहले चेतावनी, फिर पानी की बौछार या सामान्य बल) होती है, लेकिन पुलिस ने सीधे पैलेट गन का इस्तेमाल किया जो ‘न्यूनतम आवश्यक बल’ के सिद्धांत के खिलाफ है।
प्रतिबंध की मांग: पैलेट गन की अनिश्चित दिशा और घातक मारक क्षमता को देखते हुए इसे पूरी तरह गैर-संवैधानिक घोषित कर प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।
मुआवजा: पीड़ितों के लिए विशेष मुआवजे और पूर्ण पुनर्वास की मांग अदालत के सामने रखी गई है

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