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फीलखाना थाना क्षेत्र कानपुर नगर: दोस्त की पत्नी से अवैध संबंध के शक में:एसिड अटैक

एसिड बिक्री पर कुछ नियंत्रण : अवैध इस्तेमाल जारी
आरोपी: गुलफाम (जाजमऊ निवासी), पीड़ित को दोस्त के रूप में जानता था
हमले के बाद मौके पर भीड़ ने आरोपी को पकड़ कर पीटा और पुलिस के हवाले कर दिया
पीड़ित: शाहिद गंभीर रूप से झुलस गया और अस्पताल में भर्ती हालत गंभीर
कानपुर:19 मार्च 2026
फीलखाना थाना क्षेत्र कानपुर नगर में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है जिसमें पत्नी से अवैध संबंध के शक में एक युवक पर एसिड अटैक किया गया।मुख्य विवरण:स्थान: फीलखाना थाना क्षेत्र (पटका पुर इलाका), कानपुर।
पीड़ित: शाहिद (उम्र लगभग 38 वर्ष), जो एक कारखाने या इलाके में काम करता था।
आरोपी: गुलफाम (जाजमऊ निवासी), जो पीड़ित को अपने दोस्त या परिचित के रूप में जानता था।
कारण: आरोपी को शक था कि उसकी पत्नी और शाहिद के बीच अवैध संबंध हैं। उसने तेजाब और ब्लेड लेकर शाहिद के कारखाने पहुंचकर उसे बाहर बुलाया, पहले ब्लेड से हमला किया और फिर चेहरे पर एसिड फेंक दिया।
परिणाम: शाहिद गंभीर रूप से झुलस गया और उसे उर्सला अस्पताल (या अन्य सरकारी अस्पताल) में भर्ती कराया गया। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
आरोपी की गिरफ्तारी: हमले के बाद मौके पर ही भीड़ ने गुलफाम को पकड़ लिया, पीटा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। घटना पारस्परिक हिंसा, ईर्ष्या से उपजी हिंसा, और संक्षारक पदार्थों (एसिड) के आसान उपलब्ध होने की समस्या को फिर से उजागर करती है। भारत में एसिड अटैक के मामले अभी भी चिंताजनक हैं, भले ही एसिड बिक्री पर कुछ नियंत्रण हो, लेकिन अवैध तरीके से इसका इस्तेमाल जारी है। घटनाएं न सिर्फ शारीरिक आघात पहुंचाती हैं, बल्कि पीड़ित के जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति को भी बुरी तरह प्रभावित करती हैं। कानूनन एसिड अटैक अब गंभीर अपराध है (IPC की धारा 326A/326B के तहत आजीवन कारावास तक की सजा संभव)।
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 326A और 326B एसिड अटैक (तेजाब हमले) से संबंधित गंभीर अपराध हैं। धारा 326A एसिड फेंककर गंभीर चोट पहुंचाने (न्यूनतम 10 साल से आजीवन कारावास) के लिए है, जबकि 326B तेजाब फेंकने का प्रयास करने (5-7 साल की कैद) से संबंधित है। ये लिंग-तटस्थ धाराएं हैं जो संज्ञेय, गैर-जमानती हैं।
IPC की धारा 326A और 326B का विवरण (भारतीय न्याय संहिता – BNS में):धारा 326A (IPC) – स्वेच्छा से एसिड द्वारा गंभीर चोट पहुंचाना:अपराध: यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर एसिड फेंकता है या इस्तेमाल करता है, जिससे शरीर का कोई हिस्सा स्थायी या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त, विकृत, या जल जाए।
सजा: न्यूनतम 10 वर्ष का कठोर कारावास, जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकता है, और जुर्माना (जुर्माना पीड़ित के चिकित्सा खर्च के लिए होगा)।
प्रकृति: संज्ञेय (Cognizable), गैर-जमानती (Non-bailable), और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय।
धारा 326B (IPC) – तेजाब फेंकने का प्रयास करना:अपराध: यदि कोई व्यक्ति किसी को नुकसान पहुंचाने के इरादे से तेजाब फेंकता है या फेंकने का प्रयास करता है, भले ही सामने वाले को गंभीर चोट न लगी हो।
सजा: न्यूनतम 5 वर्ष का कारावास, जो 7 वर्ष तक बढ़ सकता है, और जुर्माना।
1 जुलाई 2024 से, इन धाराओं को भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत नई धाराओं (जैसे, 326B का प्रतिस्थापन) द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है, लेकिन अपराध का सार और सजा लगभग वही रहती है

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