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देश में तेल की कीमतो में लगातार वृद्धि:जनता की जेब काटकर “विकास” का ढोल

क्रूड सस्ता, पेट्रोल महंगा— यही है नया आर्थिक मॉडल?
तेल की कीमत नहीं… सरकार की नीयत महंगी
बढ़ोतरी की निंदा राहुल गांधी विपक्षी नेता
कानपुर: 25 मई 2026
सोशल मीडिया पोस्ट से
Kunal Choudhary@KunalChoudhary.7h
कच्चे तेल के दाम गिरते हैं तो सरकार चुप… लेकिन टैक्स बढ़ाकर पेट्रोल-डीज़ल महंगा करने में रिकॉर्ड तेजी! 98 डॉलर प्रति बैरल पर भी जनता को राहत नहीं, क्योंकि तेल की कीमत नहीं… सरकार की नीयत महंगी है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम घटते हैं तब फायदा जनता को क्यों नहीं मिलता? हर बार जनता की जेब काटकर “विकास” का ढोल पीटा जाता है। एक तरफ महंगाई से जनता परेशान, किसान डीज़ल के बोझ तले दबा, दूसरी तरफ सरकार टैक्स वसूली में मस्त! “क्रूड सस्ता, पेट्रोल महंगा” — यही है नया आर्थिक मॉडल?
Dr. Ragini Nayak@NayakRagini·12h
आज जब Brent Crude की कीमत 100$ प्रति बैरल से नीचे आ गयी यानी कि Crude oil दुनिया भर में 98.27 $ प्रति बैरल के दाम पर मिल रहा है… तो आप ने आज पेट्रोल पर 2.87 रुपए और डीजल पर 2.80 रुपए क्यों बढ़ा दिए मोदी जी ? आम आदमी को तिल-तिल कर क्यों मारने पर क्यों आमादा हैं आप मोदी जी ???
Dinesh Purohit@Imdineshpurohit·4h
10 दिन में चौथी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। पेट्रोल ₹7.35 और डीजल ₹7.53 महंगा हो चुका है। UPA सरकार के दौरान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें 175% बढ़ी थीं, लेकिन मोदी सरकार में अंतरराष्ट्रीय कीमतें नहीं बढ़ीं, फिर भी जनता पर लगातार बोझ डाला जा रहा है। 2014 में पेट्रोल ₹71 था, आज ₹102 पार। डीजल ₹56 से बढ़कर ₹95 पहुंच गया। हर बढ़ोतरी आम आदमी, किसानों, MSMEs और हर घर के बजट पर सीधा हमला है। लेकिन सवाल यह है कि, इस रोज़ की लूट से फायदा किसे हो रहा है?
Raj Academy Prayagraj@rajacademypra·15h
पेट्रोल 2.61 और डीजल 2.71रुपए मात्र की वृद्धि जहां विश्व गुरु देश में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही है वहीं पर गरीब देशों जैसे पाकिस्तान नेपाल और बांग्लादेश में तेल की कीमत लगातार घट रही है आखिर मोदी जी ने विदेश में क्या कमाया जिस देश की जनता ही भीख मांगने पर आ गई इन सब मुद्दों गहराई और चिंता से नहीं लेता और एक बात समझ लीजिए कि आने वाले समय में बहुत ही भयंकर आर्थिक संकट आने वाला है देश की जनता कंगाल होगी
नई दिल्ली: 25 मई 2026
सरकारी तेल कंपनियों ने 25 मई 2026 को पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये की बढ़ोतरी की, जिससे इन ईंधनों की कुल बढ़ोतरी 15 मई के बाद से लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण ईरान युद्ध में अमेरिका और इज़राइल के बीच चल रहे संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक कच्चे तेल की अनिश्चितता है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ है, जहां से भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 40% आयात करता है।
इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 97-98 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास मँडरा रही हैं।
विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस बढ़ोतरी की निंदा की है, जबकि भाजपा के प्रतिनिधियों ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न कर दरों की तुलना की है और बताया है कि यहां की बढ़ोतरी अन्य देशों की तुलना में 20-60% कम है।
मौजूदा स्थिति में, संभावना है कि तेल कंपनियों को घाटे से उबरने के लिए आने वाले समय में और अधिक मूल्य वृद्धि करनी पड़ सकती है। कुल मिलाकर, ये घटनाएँ प्रदर्शित करती हैं कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का प्रतिकूल प्रभाव सीधे तौर पर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

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