‘Native Indian language’ शब्दावली पर पुनर्विचार की ज़रूरत
विस्तृत सुनवाई 22 जुलाई 2026 को
अदालत ने पूछा कि क्या अंग्रेज़ी को भारत में “indigenous language” माना जा सकता है
यह लंबे समय से न्यायालय और शिक्षा प्रणाली का हिस्सा रही
कक्षा 9 से छात्रों को दो भारतीय भाषाएँ अनिवार्य रूप से पढ़नी होंगी
कानपुर:15 जुलाई 2026
नई दिल्ली:15 जुलाई 2026
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की तीन-भाषा नीति पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन यह सवाल उठाया कि क्या अंग्रेज़ी को “गैर-देशी भाषा” मानना उचित है। अदालत ने कहा कि ‘native Indian language’ शब्दावली पर पुनर्विचार की ज़रूरत है और इस पर विस्तृत सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ
मुख्य बेंच: CJI सुर्या कांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन।
अंग्रेज़ी पर सवाल: अदालत ने पूछा कि क्या अंग्रेज़ी को भारत में “indigenous language” माना जा सकता है, क्योंकि यह लंबे समय से न्यायालय और शिक्षा प्रणाली का हिस्सा रही है।
Native शब्द पर स्पष्टता: जस्टिस बागची ने कहा कि “native Indian language” को “Indian indigenous language” के रूप में समझा जा सकता है, लेकिन शब्दावली को पुनः देखना होगा।
नीति का सार
कक्षा 9 से लागू: छात्रों को तीन भाषाएँ पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ होंगी।
गैर-देशी भाषाएँ: अंग्रेज़ी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी, स्पैनिश आदि को “non-native” श्रेणी में रखा गया है।
CBSE का बचाव: CBSE और केंद्र ने कहा कि यह नीति बहुभाषावाद और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी है।
पिटीशनर्स की आपत्ति:
CBSE को कानूनी अधिकार नहीं है, केवल NCERT को है।
कई भाषाओं के लिए शिक्षक और किताबें उपलब्ध नहीं हैं।
छात्रों को अचानक नई भाषा पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
प्रमुख विवाद
मुद्दा CBSE का दृष्टिकोणपिटीशनर्स का तर्कअंग्रेज़ी की स्थिति गैर-देशी भाषा अंग्रेज़ी को भारत में indigenous माना जा सकता है
कानूनी अधिकार CBSE ने NEP-2020 के तहत नीति लागू की केवल NCERT को अधिकार है
शिक्षक/पुस्तकें समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएँगी वर्तमान में संसाधन नहीं हैं
समयरेखा 2026-27 से लागू NEP में 2030 से प्रस्तावित था
आगे की दिशा
अगली सुनवाई: 22 जुलाई 2026 को।
संभावित असर: यदि अदालत अंग्रेज़ी को “देशी भाषा” मान लेती है, तो नीति की संरचना बदल सकती है।
छात्रों पर प्रभाव: कक्षा 9 से छात्रों को दो भारतीय भाषाएँ अनिवार्य रूप से पढ़नी होंगी, जिससे कई को अपनी पुरानी विदेशी भाषा छोड़नी पड़ सकती है।
नीति क्या है और विरोध क्यों?अनिवार्य भारतीय भाषाएं: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लागू इस नीति में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।
छात्रों और शिक्षकों की चिंता: याचिकाकर्ताओं (छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों) का तर्क है कि इस अचानक बदलाव से विदेशी भाषाओं (जैसे फ्रेंच, जर्मन) की पढ़ाई कर रहे छात्रों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
संसाधनों की कमी: कोर्ट में दलील दी गई कि स्कूलों के पास अभी नई भाषाओं की पर्याप्त पाठ्यपुस्तकें और योग्य शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
सीबीएसई और कोर्ट का रुखसीबीएसई की सफाई: बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 9 से लागू होने वाली इस तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, बल्कि इसका मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक (Internal) रूप से किया जाएगा।
पुरानी व्यवस्था: मौजूदा कक्षा 10 (2026-27 सत्र) के छात्रों पर इसका असर नहीं पड़ेगा और वे दो भाषाओं की पुरानी व्यवस्था से ही परीक्षा दे सकेंगे।
कोर्ट का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने नीति पर रोक लगाने से मना करते हुए कहा कि वह मामले के सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगा, लेकिन अंतरिम सुरक्षा या स्टे देने का कोई औचित्य नहीं है।









