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वाराणसी प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को आधिकारिक तौर पर विश्व धरोहर का दर्जा

घोषणा तिथि: 25 जुलाई 2026
स्थान: बुसान, दक्षिण कोरिया (यूनेस्को सत्र)
क्रम संख्या: भारत का 45वां विश्व धरोहर स्थल
उत्तर प्रदेश: ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के बाद चौथा (पूर्वांचल का पहला) स्थल
टेंटेटिव सूची में प्रवेश: 3 जुलाई 1998
भगवान बुद्ध ने बोधगया के बाद यहीं अपना पहला उपदेश (धर्मचक्र प्रवर्तन) दिया था।
यहां मौर्य सम्राट अशोक द्वारा निर्मित अशोक स्तंभ है, जिसका सिंहशीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
कानपुर: 25 जुलाई 2026
वाराणसी: 25 जुलाई 2026
वाराणसी के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में 25 जुलाई 2026 को आधिकारिक तौर पर विश्व धरोहर का दर्जा मिल गया है। 28 साल के लंबे इंतजार के बाद सारनाथ भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा यूनेस्को स्थल बन गया है।
ऐतिहासिक घोषणा और विवरण
घोषणा तिथि: 25 जुलाई 2026
स्थान: बुसान, दक्षिण कोरिया (यूनेस्को सत्र)
क्रम संख्या: भारत का 45वां विश्व धरोहर स्थल
उत्तर प्रदेश में स्थिति: ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के बाद चौथा (पूर्वांचल का पहला) स्थल
टेंटेटिव सूची में प्रवेश: 3 जुलाई 1998
सारनाथ का महत्व
भगवान बुद्ध ने बोधगया के बाद यहीं अपना पहला उपदेश (धर्मचक्र प्रवर्तन) दिया था।
यहां मौर्य सम्राट अशोक द्वारा निर्मित अशोक स्तंभ है, जिसका सिंहशीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
इस मान्यता से वैश्विक स्तर पर बौद्ध पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

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