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प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस सांसद: देश की शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना

हक की मांग कर रहे छात्रों पर लाठियां बरसाने और आंसू गैस छोड़ने की क्या जरूरत थी?
पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए हैं, जिससे करीब 7.5 करोड़ छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
सरकार को   छात्रों के मानसिक तनाव, बढ़ती आत्महत्याओं और बेरोजगारी  मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
कानपुर: 4 अगस्त 2026
नई दिल्ली: 4 अगस्त 2026
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर यह तीखा हमला बोला है. उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की.
उनके इस भाषण के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
कैमरे का एंगल बनाम दिल का एंगल
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि वे अपने इंस्टाग्राम वीडियो या प्रचार के लिए कैमरे का एंगल बदलने के बजाय अपने दिल का एंगल बदलें। उन्होंने कहा कि सरकार केवल अपनी छवि चमकाने में लगी है, जबकि युवाओं और ‘Gen Z’ का भरोसा जीतने के लिए उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।
शिक्षा व्यवस्था और बजट पर आरोपघटता बजट: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान शिक्षा बजट को बेहतर करने के बजाय उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने पर अधिक रहता है।
योग्यता बनाम पैसा: उन्होंने दावा किया कि शिक्षा प्रणाली में गंभीर खामियों के कारण अब युवाओं को लगने लगा है कि मेहनत से ज्यादा बेईमानी और पैसा मायने रखता है।
पेपर लीक: उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए हैं, जिससे करीब 7.5 करोड़ छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस पर सवाल
प्रियंका गांधी ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए बल प्रयोग को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से सीधे सवाल पूछे: उन्होंने पूछा कि अपने हक की मांग कर रहे छात्रों पर लाठियां बरसाने और आंसू गैस छोड़ने की क्या जरूरत थी?
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि छात्रों पर पड़ी हर एक लाठी प्रदर्शनकारियों से ज्यादा भाजपा सरकार की प्रतिष्ठा और उसकी पीठ पर चोट करती है।
सरकार को अपनी ‘अकड़’ छोड़कर छात्रों के मानसिक तनाव, बढ़ती आत्महत्याओं और बेरोजगारी जैसे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

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