सपा ने गोमती नगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में ‘ब्राह्मण सम्मेलन’ करने के लिए आवेदन किया था।
प्रशासनिक स्तर पर अनुमति लटकी रही और मंजूरी नहीं मिली।
चुनाव 2027: भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा नया सामाजिक समीकरण बनाने की रणनीति
कानपुर: 4 अगस्त 2026
लखनऊ: 4 अगस्त 2026
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता ‘छोटे लोहिया’ पंडित जनेश्वर मिश्र की जयंती (5 अगस्त) अब लखनऊ स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क के बजाय सपा के प्रदेश कार्यालय में मनाई जाएगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और यूपी सरकार द्वारा ऐन वक्त तक पार्क में कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद पार्टी ने अपने आयोजन का स्थान बदल दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े मुख्य बिंदु और राजनीतिक समीकरण इस प्रकार हैं:
आयोजन स्थल में बदलाव
कानपुर: 4 अगस्त 2026
लखनऊ: 4 अगस्त 2026
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता ‘छोटे लोहिया’ पंडित जनेश्वर मिश्र की जयंती (5 अगस्त) अब लखनऊ स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क के बजाय सपा के प्रदेश कार्यालय में मनाई जाएगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और यूपी सरकार द्वारा ऐन वक्त तक पार्क में कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद पार्टी ने अपने आयोजन का स्थान बदल दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े मुख्य बिंदु और राजनीतिक समीकरण इस प्रकार हैं:
आयोजन स्थल में बदलाव
- पार्क में अनुमति नहीं: सपा ने लखनऊ के गोमती नगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में बड़े स्तर पर ‘ब्राह्मण सम्मेलन’ (ब्राह्मणों का जुटान) करने के लिए आवेदन किया था। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर अनुमति लटकी रही और मंजूरी नहीं मिली।
- नया स्थान: अब यह भव्य कार्यक्रम सपा के प्रदेश मुख्यालय (लखनऊ) में आयोजित किया जा रहा है।
- मुख्य अतिथि: सपा प्रमुख अखिलेश यादव पार्टी कार्यालय में जनेश्वर मिश्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे।
- सपा के आरोप और प्रतिक्रिया
- सांसद सनातन पांडेय का बयान: कार्यक्रम के संयोजक और बलिया से सपा सांसद सनातन पांडेय ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से जानबूझकर इस आयोजन को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार नहीं चाहती कि जनेश्वर मिश्र की जयंती पर इतना बड़ा समागम हो।
- प्रदेश सचिव का तंज: एक रिपोर्ट के अनुसार, सपा प्रदेश सचिव आशीष चौबे ने कहा कि सरकार सपा में ब्राह्मण समाज की बढ़ती भागीदारी और एकजुटता से घबरा गई है।
बड़ा राजनीतिक संदेश और रणनीति
- ब्राह्मणों को साधने की कवायद: सपा इस जयंती के माध्यम से प्रदेशभर के प्रबुद्ध और ब्राह्मण समाज को पार्टी के साथ जोड़ने के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहती है।
- 2027 की तैयारी: राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस कार्यक्रम को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भाजपा के मजबूत पारंपरिक वोट बैंक (ब्राह्मण समाज) में सेंध लगाने और नया सामाजिक समीकरण बनाने की सपा की सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
- पार्क में अनुमति न मिलने के बावजूद सपा कार्यकर्ता प्रदेश के अलग-अलग जिलों (जैसे कानपुर और आसपास के क्षेत्र) से भारी संख्या में लखनऊ कार्यालय पहुंच रहे हैं।









