पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द शुल्कों को दोबारा लागू करने के लिए ‘जबरन श्रम’ रूप में इस्तेमाल
1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301का उपयोग करते हुए 10% से 12.5% तक का नया आयात शुल्क
नया टैक्स ढांचा अमेरिका के कुल आयात के 99.4 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है
जब कोर्ट मुकदमे पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाता, तब तक यह टैरिफ लागू रहेगा
कानपुर: 4 अगस्त 2026
न्यूयॉर्क: 4 अगस्त 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत 60 देशों पर लगाए गए नए आयात शुल्क (टैरिफ) के खिलाफ अमेरिका के 25 राज्यों ने सोमवार (3 अगस्त 2026) को न्यूयॉर्क स्थित ‘यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में मुकदमा दायर कर दिया है। इन राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए शुल्कों को दोबारा लागू करने के लिए ‘जबरन श्रम’ (Forced Labour) को एक कानूनी बहाने के रूप में इस्तेमाल किया है।
1. विवाद की मुख्य बातें और नया टैरिफ ढांचालगाया गया शुल्क: ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 (Section 301) का उपयोग करते हुए 10% से 12.5% तक का नया आयात शुल्क लगाया है।
व्यापक दायरा: यह नया टैक्स ढांचा अमेरिका के कुल आयात के 99.4 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है, जिससे यह अमेरिकी इतिहास के सबसे व्यापक प्रतिबंधों में से एक बन गया है।
प्रशासन का तर्क: व्हाइट हाउस और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के अनुसार, यह शुल्क उन देशों पर लगाया गया है जो जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात और वैश्विक सप्लाई चेन में उनके प्रवाह को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं।
2. भारत के लिए स्थिति और प्रभावकम स्लैब में राहत: भारत को मूल रूप से प्रस्तावित 12.5% शुल्क के दायरे में रखा जाना था। हालांकि, भारत सरकार द्वारा अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद, भारत को राहत देते हुए निचले 10% वाले स्लैब में रखा गया है।
प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्र: भले ही भारत पर कम दर लागू है, फिर भी अमेरिका जाने वाले भारतीय निर्यात (जैसे कपड़ा व गारमेंट्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स और केमिकल्स) पर इस 10% अतिरिक्त शुल्क का सीधा वित्तीय असर पड़ेगा।
अंतरिम समझौता: भारत सरकार वर्तमान में इस मुद्दे को पूरी तरह से अनुचित मानती है और इसे बातचीत या एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) के माध्यम से सुलझाने का प्रयास कर रही है।
3. अमेरिकी राज्यों द्वारा मुकदमेबाजी का कारणघरेलू महंगाई का डर: न्यूयॉर्क और ओरेगन जैसे मुख्य रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 राज्यों का कहना है कि यह टैक्स अंततः अमेरिकी परिवारों और व्यवसायों पर बोझ बढ़ाएगा, जिससे घरेलू स्तर पर दैनिक वस्तुओं की कीमतें (महंगाई) तेजी से बढ़ेंगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप: इन राज्यों की अटॉर्नी जनरल (जैसे न्यूयॉर्क की लेटिटिया जेम्स) का आरोप है कि इस साल फरवरी में जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पिछले व्यापक टैरिफ प्लान को अवैध ठहरा दिया था, तो प्रशासन अब पिछले दरवाजे से इसे दोबारा थोपने का प्रयास कर रहा है।
अवैज्ञानिक और त्वरित जांच: याचिका में कहा गया है कि आम तौर पर किसी एक देश की जांच में महीनों लगते हैं, लेकिन USTR ने मात्र दो महीनों के भीतर 60 देशों की त्वरित जांच पूरी कर बिना किसी मजबूत आधार के सभी पर एक जैसा व्यापक शुल्क थोप दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत 60 देशों पर लगाए गए नए आयात शुल्क (टैरिफ) के खिलाफ अमेरिका के 25 राज्यों ने सोमवार (3 अगस्त 2026) को न्यूयॉर्क स्थित ‘यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में मुकदमा दायर कर दिया है। इन राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए शुल्कों को दोबारा लागू करने के लिए ‘जबरन श्रम’ (Forced Labour) को एक कानूनी बहाने के रूप में इस्तेमाल किया है।
1. विवाद की मुख्य बातें और नया टैरिफ ढांचालगाया गया शुल्क: ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 (Section 301) का उपयोग करते हुए 10% से 12.5% तक का नया आयात शुल्क लगाया है।
व्यापक दायरा: यह नया टैक्स ढांचा अमेरिका के कुल आयात के 99.4 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है, जिससे यह अमेरिकी इतिहास के सबसे व्यापक प्रतिबंधों में से एक बन गया है।
प्रशासन का तर्क: व्हाइट हाउस और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के अनुसार, यह शुल्क उन देशों पर लगाया गया है जो जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात और वैश्विक सप्लाई चेन में उनके प्रवाह को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं।
2. भारत के लिए स्थिति और प्रभावकम स्लैब में राहत: भारत को मूल रूप से प्रस्तावित 12.5% शुल्क के दायरे में रखा जाना था। हालांकि, भारत सरकार द्वारा अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद, भारत को राहत देते हुए निचले 10% वाले स्लैब में रखा गया है।
प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्र: भले ही भारत पर कम दर लागू है, फिर भी अमेरिका जाने वाले भारतीय निर्यात (जैसे कपड़ा व गारमेंट्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स और केमिकल्स) पर इस 10% अतिरिक्त शुल्क का सीधा वित्तीय असर पड़ेगा।
अंतरिम समझौता: भारत सरकार वर्तमान में इस मुद्दे को पूरी तरह से अनुचित मानती है और इसे बातचीत या एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) के माध्यम से सुलझाने का प्रयास कर रही है।
3. अमेरिकी राज्यों द्वारा मुकदमेबाजी का कारणघरेलू महंगाई का डर: न्यूयॉर्क और ओरेगन जैसे मुख्य रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 राज्यों का कहना है कि यह टैक्स अंततः अमेरिकी परिवारों और व्यवसायों पर बोझ बढ़ाएगा, जिससे घरेलू स्तर पर दैनिक वस्तुओं की कीमतें (महंगाई) तेजी से बढ़ेंगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप: इन राज्यों की अटॉर्नी जनरल (जैसे न्यूयॉर्क की लेटिटिया जेम्स) का आरोप है कि इस साल फरवरी में जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पिछले व्यापक टैरिफ प्लान को अवैध ठहरा दिया था, तो प्रशासन अब पिछले दरवाजे से इसे दोबारा थोपने का प्रयास कर रहा है।
अवैज्ञानिक और त्वरित जांच: याचिका में कहा गया है कि आम तौर पर किसी एक देश की जांच में महीनों लगते हैं, लेकिन USTR ने मात्र दो महीनों के भीतर 60 देशों की त्वरित जांच पूरी कर बिना किसी मजबूत आधार के सभी पर एक जैसा व्यापक शुल्क थोप दिया।
4. आगे क्या होगा?
जब कोर्ट इस मुकदमे पर कोई अंतरिम रोक (Stay Order) नहीं लगाता, तब तक यह टैरिफ लागू रहेगा और अमेरिकी आयातकों को यह शुल्क चुकाना होगा। यदि अमेरिकी अदालतें राज्यों के पक्ष में फैसला सुनाती हैं, तो भारत सहित अन्य वैश्विक व्यापारिक भागीदारों को बड़ी राहत मिलेगी और उनके उत्पाद अमेरिकी बाजारों में फिर से प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।
जब कोर्ट इस मुकदमे पर कोई अंतरिम रोक (Stay Order) नहीं लगाता, तब तक यह टैरिफ लागू रहेगा और अमेरिकी आयातकों को यह शुल्क चुकाना होगा। यदि अमेरिकी अदालतें राज्यों के पक्ष में फैसला सुनाती हैं, तो भारत सहित अन्य वैश्विक व्यापारिक भागीदारों को बड़ी राहत मिलेगी और उनके उत्पाद अमेरिकी बाजारों में फिर से प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।









