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राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान पर मतदाता सूची में हेरफेर करने का गंभीर आरोप

विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत हो रहे “थोक नाम हटाने”  को तुरंत रोकने की अपील
प्रशासनिक कवायद का उपयोग भारतीय जनता पार्टी  को चुनाव जिताने में मदद करने के लिए
भाजपा किसी भी कीमत पर जीत सुनिश्चित करना चाहती है।
सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग की “तटस्थ प्रक्रिया” मानती हैं, तो लोकतंत्र गहरे संकट में पड़ सकता है
कानपुर:2 सितम्बर 2026
नई दिल्ली: 2 सितम्बर 2026
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग (ECI) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान पर मतदाता सूची में हेरफेर करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस प्रक्रिया के तहत हो रहे “थोक नाम हटाने”  को तुरंत रोकने की अपील की है। सिब्बल का दावा है कि इस प्रशासनिक कवायद का उपयोग भारतीय जनता पार्टी  को चुनाव जिताने में मदद करने के लिए किया जा रहा है।
कपिल सिब्बल द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु और इस मामले की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
कपिल सिब्बल के प्रमुख आरोप:
अदालत का हस्तक्षेप: खबरों के अनुसार, यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि वास्तविक मतदाताओं का “सामूहिक निष्कासन” पाया गया, तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगी। अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना: सिब्बल ने आरोप लगाया कि झारखंड के गोड्डा जैसे क्षेत्रों में अल्पसंख्यक मतदाताओं को लक्षित किया जा रहा है।
दस्तावेजों का सत्यापन: अदालत ने आयोग को सत्यापन प्रक्रिया के लिए आधार, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों पर विचार करने का निर्देश दिया है।
फॉर्म 7 का दुरुपयोग: भाजपा एजेंटों द्वारा बड़े पैमाने पर फॉर्म 7 जमा करके वैध मतदाताओं के नाम कटवाने का दावा किया गया है।
बहिष्कार की राजनीति: उन्होंने इस प्रक्रिया को “बहिष्कार की राजनीति” कहा, जिससे वास्तविक नागरिकों के मतदान अधिकार पर संकट आ सकता है।
देशव्यापी विसंगतियां: विपक्ष ने बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पंजाब जैसी जगहों पर भी मतदाता सूचियों से लाखों नाम हटाए जाने पर गंभीर चिंता जताई है।
आयोग की सफाई: चुनाव आयोग के वकीलों का तर्क है कि यह अभी केवल एक ड्राफ्ट रोल (प्रारूप सूची) है। आयोग का उद्देश्य नियमानुसार केवल फर्जी, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को पारदर्शी बनाना है।
मुख्य बिंदु
सिब्बल का आरोप:
SIR का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में हेरफेर करने और भाजपा को फायदा पहुँचाने के लिए किया जा रहा है।
झारखंड के गोड्डा ज़िले में भाजपा एजेंट्स ने अल्पसंख्यक समुदाय के वोटरों को हटाने के लिए Form 7 का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया।
इन फॉर्म्स में बिना कारण बताए नाम हटाए जा सकते हैं, और अगर आरोप झूठा निकले तो भी कोई कार्रवाई नहीं होती।
गंभीर आँकड़े:
दिल्ली में लगभग 45–47 लाख नाम काटे गए, जो कुल मतदाता सूची का करीब 23–24% है।
उत्तर प्रदेश में 2.05 करोड़ नाम हटाए गए।
अब तक पूरे देश में 5–6 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं।
विपक्ष का रुख:
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को “BJP Kursi Bachao Aayog” और “Vote Chori Aayog” कहा।
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में 2.06 करोड़ नाम हटाए जाने का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा किसी भी कीमत पर जीत सुनिश्चित करना चाहती है।
कपिल सिब्बल ने चेतावनी दी कि अगर अदालतें इस मुद्दे पर ध्यान नहीं देतीं और इसे चुनाव आयोग की “तटस्थ प्रक्रिया” मानती हैं, तो लोकतंत्र गहरे संकट में पड़ सकता है

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