Home » राजनीत » कर्नाटक राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर राज्य सरकार केआदेश पर पुनर्विचार करने को कहा: सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को पहले दो अंतरों तक सीमित कर दिया गया

कर्नाटक राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर राज्य सरकार केआदेश पर पुनर्विचार करने को कहा: सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को पहले दो अंतरों तक सीमित कर दिया गया

कर्नाटक सरकार द्वारा 8 सितंबर, 2026 को जारी आदेश के बाद राजनीतिक और संवैधानिक विवाद गया गह
केंद्र और राज्य की कार्यकारी शक्तियों के बीच टकराव और कानूनी विवाद को  दे सकता है जन्म।
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल स्वयं शामिल हो रहे हों।
कानपुर:22सितम्बर 2026
कर्नाटक :22सितम्बर 2026
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर राज्य सरकार के उस आदेश पर पुनर्विचार करने को कहा है, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को केवल पहले दो अंतरों (पदों) तक सीमित कर दिया गया है.
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा 8 सितंबर, 2026 को जारी किए गए इस आदेश के बाद राज्य में राजनीतिक और संवैधानिक विवाद गहरा गया है। इस मामले से जुड़े मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. राज्यपाल की आपत्तियां और तर्कसंवैधानिक और कानूनी सवाल:
राज्यपाल ने 21 सितंबर, 2026 को लिखे अपने पत्र में कहा कि राज्य सरकार का यह आदेश केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के विपरीत प्रतीत होता है। यह संविधान के तहत केंद्र और राज्य की कार्यकारी शक्तियों के बीच टकराव और कानूनी विवाद को जन्म दे सकता है।
केंद्रीय कानूनों का उल्लंघन: राज्यपाल ने गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देशों और संसद द्वारा पारित ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राष्ट्रीय गीत के सामूहिक गायन के लिए एक आधिकारिक संस्करण निर्धारित किया है, जिसे छोटा करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है।
राष्ट्रीय गरिमा और एकरूपता: राज्यपाल ने सलाह दी है कि किसी भी संभावित विवाद से बचने के लिए राष्ट्रीय प्रतीकों और प्रोटोकॉल के पालन में राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता और गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए।
2. कर्नाटक सरकार का आदेश और तर्कदो पदों तक सीमित: कर्नाटक सरकार के आदेश के मुताबिक, राज्य के सभी सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे।
अपवाद: यह नियम उन कार्यक्रमों पर लागू नहीं होगा जिनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल स्वयं शामिल हो रहे हों।
सरकार का पक्ष: सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार का तर्क है कि वे धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और ऐतिहासिक प्रथाओं को बनाए रखने के लिए केवल पहले दो पदों के गायन का समर्थन कर रहे हैं। 22 सितंबर को कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान यह भी दलील दी कि राष्ट्रगान की तरह राष्ट्रीय गीत का गायन अनिवार्य नहीं है।
3. विधानसभा में भारी विरोध
यह विवाद 21 सितंबर, 2026 को कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान और बढ़ गया। सदन में जैसे ही वंदे मातरम् के दो अंतरे पूरे होने के बाद ऑडियो बंद किया गया, विपक्षी भाजपा (BJP) और जेडीएस (JD-S) के विधायकों ने विरोध जताते हुए खड़े होकर वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए।
राज्यपाल ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि इस आदेश से अनावश्यक संवैधानिक मुकदमेबाजी  की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए इस फैसले पर तुरंत दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

Share This

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

Recent Post