कानपुर पुलिस ने टेनरी संचालकों समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी
250 से निवेशकों का पैसा हड़पकर शेयर होल्डिंग का मालिकाना हक सिर्फ 7 चुनिंदा लोगों में बांट दिया
पीड़ित पुलिस प्रशासन से मुलाकात कर पैसे वापस या उसके बदले में जमीन आवंटित कराने की मांग की
14 साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर न तो कोई ऑफिस है, न कर्मचारी और न ही जमीन।
कानपुर:19 अगस्त 2026
कानपुर के रमईपुर में प्रस्तावित मेगा लेदर क्लस्टर परियोजना में जमीन दिलाने के नाम पर चेन्नई के एक कारोबारी समेत करीब 250 निवेशकों से ₹32 से ₹36.50 करोड़ की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में कानपुर पुलिस ने टेनरी संचालकों समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले की मुख्य बातें:मुख्य आरोपी और शिकायत: चेन्नई के चमड़ा कारोबारी सरफराज अख्तर की शिकायत पर पुलिस कमिश्नर के आदेश के बाद जाजामऊ/चकेरी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। मुख्य आरोपियों में जाजमऊ के सुल्तान टेनर्स के मालिक अशरफ रिजवान और अन्य शामिल हैं।
धोखाधड़ी का तरीका: आरोपियों ने करीब 14 साल पहले (वर्ष 2012 के आसपास) रमईपुर में ‘मेगा लेदर क्लस्टर डेवलेपमेंट उप्र. लिमिटेड’ प्रोजेक्ट के तहत करीब 300 एकड़ जमीन खरीदने और उस पर उद्योग लगाने के लिए प्लॉट देने का झांसा दिया था।
परियोजना का सच: यह प्रोजेक्ट तय मानकों (जैसे जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम) को पूरा न कर पाने के कारण बहुत पहले ही रद्द हो चुका था, लेकिन आरोपियों ने निवेशकों को इसकी भनक नहीं लगने दी और लगातार किस्तें वसूलते रहे।
कंपनी एक्ट का उल्लंघन: निवेशकों का आरोप है कि इस विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) प्रोजेक्ट के तहत सरकार से सब्सिडी भी ली गई, लेकिन 250 से अधिक निवेशकों का पैसा हड़पकर शेयर होल्डिंग का मालिकाना हक सिर्फ 7 चुनिंदा लोगों में बांट दिया गया। 14 साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर न तो कोई ऑफिस है, न कर्मचारी और न ही जमीन।
पीड़ित निवेशकों ने अब पुलिस प्रशासन (एडीसीपी पूर्वी) से मुलाकात कर या तो अपने पैसे वापस दिलाने या उसके बदले में जमीन आवंटित कराने की मांग की है।










