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‘तहलका’ पत्रिका पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट: 10 साल की कठोर कारावास की सज़ा के खिलाफ अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट में की अपील

सुप्रीम कोर्ट से अपील लंबित रहने तक आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने से छूट मांग

गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सज़ा को बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग

10 साल की सज़ा अपराध की गंभीरता के मुकाबले बहुत कम है।
गोवा की मापुसा सत्र अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए बरी कर दिया था।
कानपुर:25 अगस्त 2026
नई दिल्ली: 25 अगस्त 2026
‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व मुख्य संपादक तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 10 साल की कठोर कारावास की सज़ा के खिलाफ अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट (SC) में अपील की है।
इस मामले की ताज़ा कानूनी स्थिति और मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
मामले की ताज़ा स्थिति (Current Status)सरेंडर से छूट की मांग:
तेजपाल के वकील: कपिल सिब्बल
गोवा सरकार का विरोध: गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि नियमों के मुताबिक मुख्य अपील पर सुनवाई से पहले तेजपाल को सरेंडर करना चाहिए
सज़ा बढ़ाने की याचिका: गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक अलग याचिका दायर कर तेजपाल की सज़ा को बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग की है, क्योंकि उनके अनुसार 10 साल की सज़ा अपराध की गंभीरता के मुकाबले बहुत कम है
कोर्ट का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर से छूट की अर्ज़ी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है और मामले को 25 अगस्त 2026 को आगे के विचार के लिए सूचीबद्ध किया है।
तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट से अपील लंबित रहने तक आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने से छूट मांगी है।

मामले की पृष्ठभूमि (Background)

चरण घटनाक्रम
नवंबर 2013 (अपराध) गोवा के एक लग्जरी होटल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तेजपाल पर अपनी जूनियर सहकर्मी का होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और बलात्कार करने का आरोप लगा
मई 2021 (निचली अदालत) गोवा की मापुसा सत्र अदालत (Sessions Court) ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था
6 अगस्त 2026 (हाईकोर्ट) बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने निचली अदालत के फैसले को “विकृत” बताते हुए पलट दिया और तेजपाल को बलात्कार (IPC 376), यौन उत्पीड़न (IPC 354A) और कपड़े उतारने की नीयत से हमला करने (IPC 354B) का दोषी ठहराया
हाईकोर्ट की सज़ा कोर्ट ने उन्हें 10 साल के कठोर कारावास और 5 लाख रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई। कानूनन इस अपराध में न्यूनतम 10 साल की सज़ा का प्रावधान है


बलात्कार: गंभीर और जघन्य अपराध है। इसमें किसी व्यक्ति की मर्जी या सहमति के बिना उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए जाते हैं। यह शारीरिक हिंसा के साथ-साथ मानसिक आघात का भी कारण बनता है।
अपराध और परिभाषा
यह किसी के शरीर और व्यक्तिगत अधिकारों का जबरन उल्लंघन है।
कानून की नजर में यह एक गैर-जमानती और अत्यंत गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।इसे शक्ति, भय या दबाव के प्रदर्शन के रूप में भी देखा जाता है
धारा 376 बलात्कार: इसके तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम 10 साल की कैद की सजा दी जाती है, जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास (उम्रकैद) भी किया जा सकता है और साथ ही जुर्माना भी लगाया जाता है। नए आपराधिक कानून में अब इसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 के तहत, बदला गया है।
मुख्य बातें और सजा के प्रावधान
सामान्य सजा: धारा 376 (1) के अनुसार, बलात्कार के दोषी को कम से कम 10 वर्ष का कठोर कारावास होता है जो आजीवन कारावास तक हो सकता है।
नाबालिग पीड़िता के मामले में: 16 वर्ष से कम उम्र की पीड़िता के साथ बलात्कार पर सजा कम से कम 20 वर्ष या आजीवन कारावास तक होती है। 12 वर्ष से कम उम्र की पीड़िता के मामले में सजा 20 साल से लेकर उम्रकैद या मृत्युदंड (फांसी) तक का प्रावधान है।
अपराध की श्रेणी: यह एक गंभीर, संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) अपराध है। इसमें आसानी से जमानत नहीं मिलती और समझौता मान्य नहीं होता।

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