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संवैधानिक संशोधन बिल (131वां संशोधन) के जरिए अनुच्छेद 81 में बड़ा बदलाव

सरकार का यू-टर्न कोने कैसे उचित: विवेचन आवश्यक
“जनसंख्या” संसद द्वारा अधिसूचित जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगी।
जनसंख्या वृद्धि, महिला प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक मजबूती के लिए आवश्यक
महिलाओं के लिए लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों में 15 साल के लिए आरक्षण
कानपुर:16 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:16 अप्रैल 2026
भारतीय लोकतंत्र की संरचना और प्रतिनिधित्व को नई जनसंख्या परिभाषा और परिसीमन प्रक्रिया के आधार पर बदलने जा रहा है। इसेके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
प्रमुख बदलाव
अनुच्छेद 55 व 81:
“जनसंख्या” की परिभाषा अब केवल नवीनतम जनगणना नहीं होगी, बल्कि संसद द्वारा अधिसूचित जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगी।
लोकसभा में राज्यों से चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 कर दी जाएगी।
अनुच्छेद 82:
परिसीमन अब हर जनगणना के बाद स्वतः नहीं होगा।
यह संसद द्वारा बनाए गए कानून और परिसीमन आयोग की शक्तियों पर निर्भर करेगा।
अनुच्छेद 170:
राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या तय करने की प्रक्रिया परिसीमन आयोग के अधीन होगी।
“अनुच्छेद 333 के अधीन” शब्द हटाए गए हैं।
अनुच्छेद 330 व 332:
अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण की नई व्यवस्था, विशेषकर पूर्वोत्तर राज्यों और त्रिपुरा में।
अनुच्छेद 334A (नया प्रावधान):
महिलाओं के लिए लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में 15 साल के लिए आरक्षण।
आरक्षित सीटें रोटेशन के आधार पर बदलती रहेंगी।
यह आरक्षण परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा।
राजनीतिक संदर्भ
विपक्ष इसे यू-टर्न बता रहा है क्योंकि सरकार अपने ही संशोधन को 30 महीने बाद पलट रही है।
विधेयक पेश करने में हुई देरी को चुनावी रणनीति से जोड़ा जा रहा है।
सांसदों के प्रचार कार्य और विधेयक पर चर्चा के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सरकार इसे जनसंख्या वृद्धि, महिला प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक मजबूती के लिए आवश्यक बता रही है।
महत्व
यह संशोधन भारतीय राजनीति का एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है क्योंकि:
संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व का ढांचा बदल जाएगा।
महिलाओं को पहली बार इतने व्यापक स्तर पर आरक्षण मिलेगा।
जनसंख्या आधारित सीट आवंटन की प्रक्रिया संसद और परिसीमन आयोग के नियंत्रण में होगी।

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