न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12
संविधान अनुच्छेद 129: सर्वोच्च न्यायालय और अनुच्छेद 215: उच्च न्यायालयों की विशेष शक्तियां
सिविल कारागार में हिरासत: अधिकतम 6 महीने के लिए सिविल जेल
कानपुर: 15 सितम्बर 2026
न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12 के तहत सिविल अवमानना (Civil Contempt) के लिए अधिकतम 6 महीने का साधारण कारावास, या ₹2,000 तक का जुर्माना, या ये दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।
सिविल अवमानना से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान निम्नलिखित हैं:
सिविल कारागार में हिरासत: यदि अदालत को लगता है कि सिर्फ जुर्माना लगाने से न्याय का उद्देश्य पूरा नहीं होगा और जेल की सजा जरूरी है, तो साधारण कारावास के बजाय दोषी को अधिकतम 6 महीने के लिए सिविल जेल में रखने का निर्देश दिया जा सकता है।
माफी का प्रावधान : यदि आरोपी न्यायालय के समक्ष सच्चे मन से (Bona fide) माफी मांगता है और न्यायालय उसकी माफी से संतुष्ट हो जाता है, तो उसकी सजा को माफ किया जा सकता है या उसे बरी किया जा सकता है।
कंपनियों के मामले में सजा: यदि अवमानना किसी कंपनी द्वारा की गई है, तो उस कंपनी के निदेशक (Director), प्रबंधक (Manager), सचिव (Secretary) या अन्य जिम्मेदार अधिकारी को दोषी मानकर सिविल कारागार में भेजा जा सकता है।
संवैधानिक शक्तियां: भारत के संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) को और अनुच्छेद 215 के तहत उच्च न्यायालयों (High Courts) को अवमानना के लिए दंडित करने की विशेष शक्तियां प्राप्त हैं。










