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सुप्रीम कोर्ट: राज्य-केंद्र का झगड़ा नहीं: मुख्यमंत्री जांच के बीच में आकर लोकतंन्त्र को खतरे में डाल दिया

ममता बनर्जी के हस्तक्षेप के कारण प्रवर्तन निदेशालय जांच में बाधा
ममता बनर्जी और अन्य अधिकारियों ने छापामार कार्रवाई के दौरान सबूतों को नष्ट करने का किया प्रयास
I-PAC टीएमसी का चुनावी सलाहकार है और वहां का डेटा राजनीतिक उद्देश्य से सुरक्षित
कानपुर:22 अप्रैल 2026
कोलकाता:22 अप्रैल 2026
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC (एक राजनीतिक सलाहकार फर्म) के कार्यालय में छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान, ममता बनर्जी के हस्तक्षेप के कारण जांच में बाधा उत्पन्न हुई, जिससे यह मामला अदालत तक पहुंच गया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “यह राज्य-केंद्र का झगड़ा नहीं है। यह एक ऐसा मामला है जहां एक व्यक्ति जो मुख्यमंत्री है, जांच के बीच में आ गया और डेमोक्रेसी को खतरे में डाल दिया”।
ED ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी और अन्य अधिकारियों ने छापामार कार्रवाई के दौरान सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया। ED का दावा है कि उनके पास इस घटना का वीडियो फुटेज है, जिसमें ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों को I-PAC के कार्यालय से दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस ले जाते हुए देखा जा सकता है। यह कार्रवाई कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को “रेस्पोंडेंट नंबर 2” के रूप में नोटिस जारी किया और 3 फरवरी को मामले की अगली सुनवाई की योजना बनाई गई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर केंद्रीय एजेंसियों को राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में काम करने से रोका गया, तो इससे कानून व्यवस्था कमजोर होगी। ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने यह तर्क किया कि I-PAC टीएमसी का चुनावी सलाहकार है और वहां का डेटा राजनीतिक उद्देश्य से सुरक्षित किया गया था। मामला न केवल ममता बनर्जी की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह कानून के शासन और केंद्रीय एजेंसियों की स्वतंत्रता के मुद्दों को भी उजागर कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अत्यंत गंभीर बताया है और सभी संबंधित पक्षों से उचित उत्तर की मांग की है। विवाद ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दिया है, जो आने वाले समय में और भी जटिल हो सकती है।

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