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भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 : पूर्ववर्ती IPC की धारा 420 और धारा 415

किसी व्यक्ति को जानबूझकर भ्रमित करना या झूठी जानकारी देना।
पीड़ित व्यक्ति को संपत्ति सौंपने या ऐसा कार्य करने के लिए प्रेरित करना जो स्थिति में न करता।
धोखे के कारण पीड़ित व्यक्ति के शरीर, मन, प्रतिष्ठा या संपत्ति को वास्तविक हानि पहुंचना।
कानपुर:16अगस्त 2026
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318 — धोखाधड़ी (Cheating)यह धारा IPC की पुरानी धाराओं 415, 417, 418 और 420 को समेकित करती है। 1 जुलाई 2024 से लागू है।धारा 318 का मूल प्रावधान(1) जो कोई किसी व्यक्ति को धोखा देकर (प्रवंचना करके), कपटपूर्वक या बेईमानी से उस व्यक्ति को उत्प्रेरित करता है कि वह कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को सौंप दे, या यह सहमति दे कि कोई व्यक्ति कोई संपत्ति अपने पास रखे, अथवा जानबूझकर उस धोखा खाए हुए व्यक्ति को ऐसा कोई कार्य करने या न करने के लिए प्रेरित करता है जिसे वह धोखा न खाया होता तो नहीं करता/नहीं छोड़ता, और जिस कार्य या लोप से उस व्यक्ति को शरीर, मन, प्रतिष्ठा या संपत्ति संबंधी नुकसान या अपहानि होती है या होने की संभावना है — वह धोखाधड़ी (छल) करता है, यह कहा जाता है।
अपराध की गंभीरता के आधार पर इस धारा को विभिन्न उप-धाराओं में बांटा गया है:

उप-धारा अपराध का प्रकार अधिकतम सजा
धारा 318(2) साधारण धोखाधड़ी करना 3 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों
धारा 318(3) उस व्यक्ति के साथ धोखा करना जिसके हितों की रक्षा करने के लिए अपराधी कानूनी रूप से बाध्य था (जैसे- ट्रस्टी या कानूनी सलाहकार) 5 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों
धारा 318(4) धोखाधड़ी करके बेईमानी से किसी की संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति (Valuable Security) हड़पना (पुरानी IPC 420) 7 साल तक की जेल और जुर्माना
स्पष्टीकरण: तथ्यों का बेईमानी से छिपाना भी इस धारा के अर्थ में धोखा (प्रवंचना) माना जाता है।
मुख्य बातें :  धोखाधड़ी साबित करने के लिए शुरुआत से ही बेईमान इरादा होना आवश्यक है। मात्र अनुबंध भंग या बाद में पैसे न लौटाना अपने आप में धोखाधड़ी नहीं बनता।नुकसान शरीर, मन, प्रतिष्ठा या संपत्ति — इनमें से किसी को भी हो सकता है।
318(4) सबसे गंभीर है (संज्ञेय और सामान्यतः अजमानतीय)। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 के अंतर्गत धोखाधड़ी एक दंडनीय अपराध माना गया है। नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद, पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (IPC) की प्रसिद्ध धारा 420 और धारा 415 को अब धारा 318 में समाहित कर दिया गया है। धारा 318 के मुख्य प्रावधान, सजा और जमानत की जानकारी नीचे दी गई है:
धोखाधड़ी के मुख्य तत्व
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318 का संबंध धोखाधड़ी से है। यह धारा उन मामलों को कवर करती है जहाँ कोई व्यक्ति छल या कपट से किसी को संपत्ति देने, रखने या ऐसा कार्य करने के लिए प्रेरित करता है जिससे उसे शारीरिक, मानसिक, प्रतिष्ठा या संपत्ति का नुकसान हो।
किसी मामले को धारा 318 के तहत धोखाधड़ी मानने के लिए ये शर्तें पूरी होनी चाहिए:धोखा देना: किसी व्यक्ति को जानबूझकर भ्रमित करना या झूठी जानकारी देना।
गलत नियत: पीड़ित व्यक्ति को संपत्ति सौंपने या कोई ऐसा कार्य करने के लिए प्रेरित करना जो वह सामान्य स्थिति में न करता।
नुकसान होना: इस धोखे के कारण पीड़ित व्यक्ति के शरीर, मन, प्रतिष्ठा या संपत्ति को वास्तविक हानि पहुंचना।
धारा 318 के तहत मिलने वाली सजा
जमानत के प्रावधान साधारण मामले:
 साधारण धोखाधड़ी के मामले आम तौर पर जमानती होते हैं।
गंभीर मामले (धारा 318(4)): यदि धोखाधड़ी के जरिए पैसे या संपत्ति हड़पी गई है, तो यह एक गैर-जमानती  और संज्ञेय  अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में सीधे पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की जा सकती है और जमानत के लिए कोर्ट के समक्ष आवेदन करना पड़ता है।

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