श्रीमद्भगवद्गीता: आलोचनाएँ: डा. राज मोहन त्रिवेदी
कर्म बनाम संन्यास का विरोधाभास सामाजिक व्यवस्था का समर्थन युद्ध का औचित्य दार्शनिक जटिलता व्यावहारिक जीवन से दूरी संतुलित दृष्टिकोण कानपुर: जुलाई 18, 2026 श्रीमद्भगवद्गीता: आलोचनाएँ: डा. राज मोहन त्रिवेदी गीता की आलोचनाएँ अक्सर विद्वानों और विचारकों द्वारा चर्चा का विषय रही हैं। यद्यपि भगवद्गीता को भारतीय दर्शन का रत्न माना जाता है, फिर भी…