• ‘एपिक फ्यूरी’ नाम का ऑपरेशन इजरायली हवाई हमलों की प्रतिक्रिया थी।
• लक्ष्य में कतर, कुवैत, अबू धाबी, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और इराक में अमेरिकी सैन्य अड्डे
• दुबई, अबू धाबी और अन्य प्रमुख शहरों को प्रभावित करते हुए 400 से अधिक मिसाइलें दागी गईं।
• प्रारंभिक रिपोर्टों में कम से कम 201 लोगों की मौत और 747 लोगों के घायल होने का संकेत
• हमलों के कारण कई देशों में डर, कम से कम 12 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द
• इज़राइल ने आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी और अपने नागरिकों को सतर्क कर दिया।
• सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को ईरानी हमले के दौरान सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
• ये घटनाएँ मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और समाधान की आवश्यकता पर प्रकाश डालती हैं।
कानपुर: फरवरी 28, 2026
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भीषण जंग शुरू हो चुका है. अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अपने संयुक्त हमलों को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) और ‘ऑपरेशन रोयरिंग लॉयन’ (Operation Roaring Lion) का नाम दिया है, जबकि ईरान ने अपने पलटवार को ‘फतेह-ए-खैबर’ (Fateh-e-Khaibar) कहा है. ईरान ने एक घंटे के भीतर सात मध्य पूर्वी देशों में इजरेली और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इस कार्रवाई को ‘एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया है, जो इज़राइल द्वारा की गई हवाई हमलों का जवाब है। इसमें ईरान ने कतर, कुवैत, अबू धाबी, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और इराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है.
इस बड़े हमले के दौरान ईरान ने 400 से अधिक मिसाइलें दागीं, जिसने दुबई, अबू धाबी और अन्य प्रमुख शहरों को भी प्रभावित किया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 201 लोगों की मौत हो चुकी है और 747 लोग घायल हुए हैं. ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमले ने कई देशों में डर पैदा कर दिया है, जिससे एयरलाइंस ने कम से कम 12 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं.
इजराइल ने अपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है और अपने नागरिकों को अलर्ट कर दिया है. जिस समय ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, उस समय देश के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को सुरक्षात्मक स्थान पर पहुंचाया गया.
इस जटिल सैन्य स्थिति ने कई देशों को चिंता में डाल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के हमले के बाद, विभिन्न देश अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर खुलकर बयान दे रहे हैं, जैसे भारत ने अपने नागरिकों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी है.
घटनाक्रम से स्पष्ट कि मध्य पूर्व में तनाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है और इसके प्रभावी समाधान की आवश्यकता महसूस की जा रही है.









