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माता रानी की कृपा प्राप्ति के लिए चैत्र नवरात्र विशेष: शुरुआत गुरुवार, 19 मार्च 2026

घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 6:52 से 7:53 बजे तक
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को सबसे पवित्र देवताओं का स्थान माना जाता
घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों से बनी बंदनवार या तोरण
स्थापना शुभ मुहूर्त में करें और मन में शुद्ध, भक्ति भाव रखें
कानपुर:11 मार्च 2026
चैत्र नवरात्र 2026 की शुरुआत गुरुवार, 19 मार्च से होगी और इसका समापन शुक्रवार, 27 मार्च को होगा। घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 6:52 से 7:53 बजे तक रहेगा।
माता रानी की कृपा प्राप्ति के लिए चैत्र नवरात्र की अवधि को विशेष माना जाता है। इस दौरान कलश स्थापना का भी विशेष महत्व है। अगर आप वास्तु नियमों का ध्यान रखते हुए चैत्र नवरात्र की तैयारियां करते हैं, तो इससे आपको अद्भुत परिणाम देखने को मिल सकते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही वास्तु उपाय बताने जा रहे हैं, जिनसे आप नवरात्र के दौरान लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह करें तैयारी नवरात्र के दौरान घर की साज-सज्जा पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके लिए आप घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों से बनी बंदनवार या तोरण (Toran) लगा सकते हैं। यह न केवल घर की शोभा बढ़ाती है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को भी घर में प्रवेश करने से रोकती है और मंगल ऊर्जा का संचार करती है। पूजा घर की दीवारों पर हल्के पीले, गुलाबी या सफेद आदि रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए। ये रंग मानसिक शांति प्रदान करते और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते में मदद करते हैं। तामसिक रंगों जैसे काले, नीले और भूरे रंग का प्रयोग पूजा कक्ष में नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह रंग सकारात्मकता में बाधक बन सकते हैं।
📅 चैत्र नवरात्र 2026 की तिथियां
दिन        तिथि                        देवी स्वरूप                विशेष पूजा
दिन 1     19 मार्च (गुरुवार)     शैलपुत्री घटस्थापना,     कलश स्थापना
दिन 2     20 मार्च                     ब्रह्मचारिणी                 तपस्या और संयम की पूजा
दिन 3     21 मार्च                     चंद्रघंटा                       साहस और शांति की आराधना
दिन 4     22 मार्च                     कूष्मांडा                     सृजन शक्ति की पूजा
दिन 5     23 मार्च                     स्कंदमाता                   मातृत्व और करुणा की पूजा
दिन 6     24 मार्च                     कात्यायनी                   बल और न्याय की आराधना
दिन 7     25 मार्च                     कालरात्रि                     नकारात्मक शक्तियों का नाश
दिन 8     26 मार्च                     महागौरी                      शुद्धता और शांति की पूजा
दिन 9     27 मार्च                     (शुक्रवार)                    सिद्धिदात्री राम नवमी, समापन पूजा
महत्व और परंपराएँ
नवरात्र का महत्व: यह पर्व सत्य की असत्य पर विजय और शक्ति की आराधना का प्रतीक है।
नवदुर्गा की पूजा: हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है।
उपवास और साधना: भक्तजन नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और देवी की आराधना करते हैं।
राम नवमी: अंतिम दिन भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त
तिथि: 19 मार्च 2026 (गुरुवार)
समय: सुबह 6:52 बजे से 7:53 बजे तक (IST)
इस समय कलश स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा आरंभ करना अत्यंत शुभ माना गया है।
महात्वपूर्ण बातें
पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और कलश स्थापना उत्तर-पूर्व दिशा में करें।
व्रत के दौरान सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
प्रतिदिन देवी के स्वरूप के अनुसार रंग और भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।
मुख्य द्वार पर तोरण: आम या अशोक के पत्तों से बनी बंदनवार या तोरण लगाना शुभ है। यह नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है और मंगलकारी ऊर्जा लाता है। आप इसे लाल या पीले रंग के कपड़े से भी सजा सकते हैं।
पूजा कक्ष के रंग: हल्के पीले, गुलाबी या सफेद रंग का प्रयोग करें। ये रंग शांति और सकारात्मकता बढ़ाते हैं। काला, गहरा नीला या भूरा रंग बिल्कुल避免 करें, क्योंकि ये तामसिक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं।
साफ-सफाई: पूजा स्थल को हमेशा स्वच्छ रखें। गंगाजल से छिड़काव करें। इससे दिव्य शक्तियां आकर्षित होती हैं।कलश स्थापना की दिशा और विधिवास्तु शास्त्र में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को सबसे पवित्र और देवताओं का स्थान माना जाता है। यहां सकारात्मक ऊर्जा सर्वाधिक होती है। इसलिए:कलश, माता की प्रतिमा/छवि और अखंड ज्योत की स्थापना ईशान कोण में ही करें।
यदि ईशान कोण उपलब्ध न हो, तो उत्तर या पूर्व दिशा में भी कर सकते हैं, लेकिन ईशान सर्वोत्तम है।
कलश कैसे तैयार करें:पीतल, तांबे या मिट्टी का कलश लें (लोहा या स्टील नहीं)।
इसमें शुद्ध जल भरें, चावल डालें (आपने सही कहा—धन-धान्य वृद्धि के लिए)।
कलश के मुख पर आम/अशोक के 5 पत्ते, नारियल, मौली बांधें।
स्वास्तिक बनाएं, सर्वऔषधि या पंचरत्न डाल सकते हैं।
समय और भावना: स्थापना शुभ मुहूर्त में करें और मन में शुद्ध, भक्ति भाव रखें। इससे पूर्ण लाभ मिलता है।

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