Home » शेयर टेलीकास्ट » भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: बाजार पूंजीकरण करीब 12 लाख करोड़ घटकर लगभग 427-428 लाख करोड़

भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: बाजार पूंजीकरण करीब 12 लाख करोड़ घटकर लगभग 427-428 लाख करोड़

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: Brent crude कीमतें $100 से ऊपर चली गईं
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बढ़ा
लंबी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत
ब्रेंट क्रूड उत्तरी सागर का एक हल्का, मीठा कच्चा तेल है
कानपुर:19 मार्च 2026
नई दिल्ली:19 मार्च 2026:
भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का दिन बहुत ही खराब रहा। वैश्विक बाजारों से मिले खराब संकेतों और बड़ी बिकवाली के चलते बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। पिछले तीन सेशन से जारी रिकवरी आज पूरी तरह धुल गई। सेंसेक्स करीब 2,496 अंक या 3.26%% टूटकर 74,207.24 के निचले स्तर तक चला गया। वहीं, निफ्टी 50 भी 775.65 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की और 23,002.15 के लेवल पर बंद हुआ। आज के कारोबारी सेशन में निवेशकों के करीब 12 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
यह गिरावट इतनी तेज थी कि BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (market cap) करीब 12 लाख करोड़ रुपये घटकर लगभग 427-428 लाख करोड़ रुपये रह गया (कल के 439 लाख करोड़ से नीचे)।मुख्य कारण:मध्य-पूर्व युद्ध में तेज escalation: ईरान ने खाड़ी क्षेत्र (Gulf) में प्रमुख ऊर्जा ठिकानों (energy facilities) पर हमले किए, जैसे कतर के Ras Laffan LNG टर्मिनल, कुवैत के रिफाइनरी, UAE और सऊदी अरब के कुछ साइट्स। यह इजराइल/अमेरिका द्वारा ईरान के South Pars गैस फील्ड (दुनिया का सबसे बड़ा) पर हमले के जवाब में था। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बढ़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: Brent crude कीमतें $100 से ऊपर चली गईं—कुछ रिपोर्ट्स में $107-114 प्रति बैरल तक पहुंचीं (5-10%+ की बढ़ोतरी एक दिन में)। उच्च तेल कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगाई, रुपये पर दबाव और कॉर्पोरेट मार्जिन को नुकसान पहुंचाती हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII selling): लगातार FII outflows जारी हैं, जो बाजार को और नीचे खींच रहे हैं।
कमजोर वैश्विक संकेत: US Fed की नीति (rates unchanged लेकिन hawkish tone), अन्य एशियाई बाजारों में गिरावट और कुल मिलाकर risk-off sentiment।सभी प्रमुख सेक्टर प्रभावित हुए—बैंकिंग, फाइनेंशियल, ऑटो, रियल एस्टेट और IT तक में 3-4%+ की गिरावट। Nifty 23,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ठीक ऊपर टिका रहा, लेकिन अगर तेल कीमतें और बढ़ीं तो आगे दबाव रह सकता है।यह बाजार में volatility का दौर है, खासकर geopolitical tensions के कारण। लंबी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन अल्पकाल में सतर्क रहना जरूरी है। अगर आपके पास कोई विशिष्ट स्टॉक या सेक्टर पर सवाल है, तो बताएं!
ब्रेंट क्रूड उत्तरी सागर का एक हल्का, मीठा कच्चा तेल है जो एक के रूप में कार्य करता है. तेल की कीमतों के लिए वैश्विक बेंचमार्क

Share This

इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया जारी करें

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

Recent Post