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विपक्ष और सरकार के बीच एसआईआर पर चल रही रणनीतिक वार्ता और टकराव से संसद शीतकालीन सत्र बेहद संवेदनशील

सत्र 1 से 19 दिसंबर 2025 तक चलेगा
विपक्ष और सरकार की रणनीतियों के बीच स्पष्ट विभाजन
संसदीय कार्य मंत्री शीतकालीन सत्र महत्वपूर्ण विधेयकों को पास करने का अवसर
विपक्षी नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर भी सीधे निशाना साधा
कानपुर 30 नवंबर 2025
नई दिल्ली:30 नवंबर 2025: विपक्ष और सरकार के बीच एसआईआर (विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण) पर चल रही रणनीतिक वार्ता और टकराव ने संसद के शीतकालीन सत्र को बेहद संवेदनशील बना दिया है। यह सत्र 1 से 19 दिसंबर 2025 तक चलेगा और शुरू होने के पहले ही दिन भारी हंगामे के आसार पैदा हो गए हैं।विपक्ष कांग्रेस, समाजवादी पार्टी तृणमूल कांग्रेस और अन्य ने संसदीय कार्यवाही के दौरान एसआईआर पर चर्चा की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई है। उनकी प्रमुख चिंताएँ मतदाता सूची में अनियमितताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा की समस्या हैं, जिसका उल्लेख हाल के दिल्ली विस्फोटों से जोड़ा जा रहा है.विपक्ष ने साफ-साफ कहा है कि यदि उनकी मांगों पर चर्चा नहीं होती है, तो वे सदन के कार्य संचालन को बाधित करेंगे। कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ‘डिरेल’ करने का प्रयास कर रही है.सरकार ने एसआईआर पर चर्चा के लिए कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है और विधायी कार्य को प्राथमिकता देने की बात की है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजिजू ने कहा है कि शीतकालीन सत्र महत्वपूर्ण विधेयकों को पास करने का अवसर है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दे शामिल हैं.संसद का पहला दिन ही हंगामेदार रहा, जिसके कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा. विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर एसआईआर और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं की गई, तो सदन में गतिरोध होगा। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर भी सीधे निशाना साधा गया है, आरोप लगाते हुए कि वे सदन में संवाद स्थापित करने से बच रहे हैं.
शीतकालीन सत्र के राजनीतिक परिदृश्य में विपक्ष और सरकार की रणनीतियों के बीच स्पष्ट विभाजन देखा जा रहा है। जहां एक ओर विपक्ष एसआईआर और अन्य मुद्दों पर स्पष्ट चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं सरकार अपने विधायी कार्य पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास कर रही है। इस स्थिति में सदन का सुचारू संचालन एक बड़ी चुनौती बन सकता है, जो लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है.

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