राज्य के किसी होटल, रेस्तरां, कैफे या सार्वजनिक स्थानों पर ग्राहकों को हुक्का नहीं परोसा जा सकता।
हुक्का बार संचालकों द्वारा दायर करीब 80 याचिकाओं को खारिज करते हुए कड़ा आदेश दिया।
खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार के लिए अलग से लाइसेंस की वैधानिक शक्ति नहीं
कानपुर:29सितम्बर 2026
लखनऊ:29सितम्बर 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 29 सितंबर 2026 को एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश में हुक्का बारों के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब राज्य के किसी भी होटल, रेस्तरां, कैफे या सार्वजनिक स्थानों पर बने निर्धारित धूम्रपान क्षेत्रों (Designated Smoking Areas) में भी ग्राहकों को हुक्का नहीं परोसा जा सकता।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने हुक्का बार संचालकों द्वारा दायर करीब 80 याचिकाओं को खारिज करते हुए यह कड़ा आदेश दिया।
इस ऐतिहासिक फैसले के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:स्वच्छ हवा का अधिकार बनाम व्यापार: हाई कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत धूम्रपान न करने वाले नागरिकों का सार्वजनिक स्थानों पर ‘स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार’ एक मौलिक अधिकार है। इसे किसी भी प्रतिष्ठान के व्यावसायिक या व्यापारिक हित (अनुच्छेद 19(1)(g)) के लिए प्रभावित नहीं किया जा सकता।
बहानेबाजी खारिज: कोर्ट ने रेस्तरां संचालकों की ‘सेल्फ-सर्विस’ या ‘हुक्का किराए पर देने’ जैसी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि हुक्का तैयार करने, कोयला बदलने और उसे सर्व करने की प्रक्रिया पूरी तरह से एक व्यावसायिक सर्विस है।
लाइसेंस देने का अधिकार नहीं:
पुलिस की कार्रवाई की शक्तियां:
अदालत ने फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को भेजकर इसका सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सरकार से अन्य राज्यों की तरह हुक्का परोसने वालों के खिलाफ कड़े दंड के प्रावधान तय करने की अपेक्षा की है।









