चुनाव आयोग और चुनावी सुधारों पर कड़ा रुख
राहुल गांधी के नेतृत्व और विचारधारा के प्रति पूर्ण निष्ठा
‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के खिलाफ मुखरता
पार्टी के भीतर पारदर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र की मांग
महिला सुरक्षा और राजनीति में प्रतिनिधित्व
केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध
लखनऊ: 31 अगस्त 2026
तमिलनाडु की करूर: 31 अगस्त 2026
एस. जोथिमणि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की एक प्रखर नेता, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो तमिलनाडु की करूर (Karur) लोकसभा सीट से दूसरी बार सांसद चुनी गई हैं। 31 अगस्त 2026 की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार, उनके हालिया राजनीतिक विचार (Political Views) और रुख निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित हैं:
1. चुनाव आयोग और चुनावी सुधारों पर कड़ा रुख
जोथिमणि ने संसद और सार्वजनिक मंचों पर देश की चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रह गया है और सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है। उन्होंने मतदाता सूचियों में हेरफेर करने, विपक्षी मतदाताओं (विशेषकर अल्पसंख्यकों और हाशिए के समुदायों) के नाम हटाने का आरोप लगाया है और चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और स्वतंत्र बनाने की वकालत की है।
2. राहुल गांधी के नेतृत्व और विचारधारा के प्रति पूर्ण निष्ठा
वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राजनीति की कट्टर समर्थक हैं। वे राहुल गांधी की “निडर और नीति-संचालित राजनीति” को आदर्श मानती हैं। विपक्षी नेताओं (जैसे कंगना रनौत) द्वारा राहुल गांधी पर की गई टिप्पणियों का उन्होंने हमेशा आक्रामक रूप से खंडन किया है और उन्हें देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखती हैं।
3. ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के खिलाफ मुखरता
हाल ही में तमिलनाडु की राजनीति में “हॉर्स-ट्रेडिंग” को लेकर उन्होंने कड़ा रुख अपनाया है। उनका मानना है कि राजनीतिक दलों को अपनी सहूलियत के हिसाब से दोहरे मापदंड नहीं अपनाने चाहिए। जब अन्य राज्यों में विधायकों की खरीद-फरोख्त गलत है, तो तमिलनाडु में भी इसके खिलाफ सख्त स्टैंड लिया जाना चाहिए।
4. पार्टी के भीतर पारदर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र की मांग
तमिलनाडु कांग्रेस के भीतर वे एक विद्रोही और स्पष्टवादी आवाज के रूप में उभरी हैं। उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी के भीतर टिकट वितरण और निर्वाचन क्षेत्रों के आवंटन में “बड़े पैमाने पर अनियमितताओं” और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनका स्पष्ट मानना है कि जमीनी स्तर के पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर नए और बाहरी लोगों को तरजीह देना पार्टी को कमजोर करता है।
5. महिला सुरक्षा और राजनीति में प्रतिनिधित्व
एक महिला सांसद के रूप में, वे राजनीति में महिलाओं के खिलाफ की जाने वाली अभद्र टिप्पणियों के खिलाफ हमेशा खड़ी रही हैं। चाहे वह भाजपा नेताओं द्वारा उनके खिलाफ की गई टिप्पणी हो या अन्य दलों द्वारा, उन्होंने महिलाओं को राजनीति में घसीटने और उन पर निजी हमले करने की संस्कृति की कड़े शब्दों में निंदा की है। वे नीति-निर्माण और संसद में महिलाओं की 50% से अधिक भागीदारी की पक्षधर हैं।
6. केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध
हाल के दिनों में, उन्होंने युवा कांग्रेस के साथ मिलकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। वे केंद्र सरकार की नीतियों को लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक ढांचे को कमजोर करने वाला (अधिनायकवादी) मानती हैं।









