याचिका का मुख्य मुद्दा कथित तौर पर “धोखे से धर्म परिवर्तन”
देश की एकता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
इस संदर्भ में अब तक कुल 9 FIR दर्ज
मामला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का मामला व बड़े धर्म परिवर्तन रैकेट की ओर इशारा
कानपुर:17 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:17 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:17 अप्रैल 2026
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) नासिक में धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न का मामला भारत के सर्वोच्च न्यायालय में पहुँच चुका है। एक याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। याचिका का मुख्य मुद्दा कथित तौर पर “धोखे से धर्म परिवर्तन” है, जिसे देश की एकता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है.
मामले की शुरुआत तब हुई जब कई महिला कर्मचारियों ने टीसीएस के नासिक कार्यालय पर एक संगठित धर्म परिवर्तन रैकेट का आरोप लगाया। आरोपों में बताया गया है कि महिलाओं को यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया और उन्हें जबरन धार्मिक गतिविधियों में शामिल किया गया. अब तक कुल 9 FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है, जैसे कि धोखाधड़ी और यौन उत्पीड़न.
याचिका अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि “धोखे से धर्म परिवर्तन” ना सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि यह संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता, और लिए एक खतरा है.
याचिका के अनुसार, सभी व्यक्तियों को धर्म को मानने, अभ्यास करने, और प्रचार करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं है। इसका मतलब यह है कि धर्म को मानने या बदलने की प्रक्रिया में धोखाधड़ी या बल प्रयोग नहीं किया जा सकता.
याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से सख्त कदम उठाने की मांग की गई है, ताकि “धोखे से धर्म परिवर्तन” को रोका जा सके। विशेष अदालतों की स्थापना की भी मांग की गई है, ताकि ऐसे मामलों की त्वरित जांच और सुनवाई की जा सके.
अदालत ने इसे गंभीरता से लिया है और मामले की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामला पहले से चल रहे धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में भी शामिल किया जा सकता है, जिससे कानून की समीक्षा की जा सके.
टीसीएस नासिक का मामला कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न का मामला व बड़े धर्म परिवर्तन रैकेट की ओर इशारा करता है, जो व्यापक सामाजिक और कानूनी मामलों का कारण बन सकता है।
याचिका अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि “धोखे से धर्म परिवर्तन” ना सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि यह संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता, और लिए एक खतरा है.
याचिका के अनुसार, सभी व्यक्तियों को धर्म को मानने, अभ्यास करने, और प्रचार करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं है। इसका मतलब यह है कि धर्म को मानने या बदलने की प्रक्रिया में धोखाधड़ी या बल प्रयोग नहीं किया जा सकता.
याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से सख्त कदम उठाने की मांग की गई है, ताकि “धोखे से धर्म परिवर्तन” को रोका जा सके। विशेष अदालतों की स्थापना की भी मांग की गई है, ताकि ऐसे मामलों की त्वरित जांच और सुनवाई की जा सके.
अदालत ने इसे गंभीरता से लिया है और मामले की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामला पहले से चल रहे धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में भी शामिल किया जा सकता है, जिससे कानून की समीक्षा की जा सके.
टीसीएस नासिक का मामला कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न का मामला व बड़े धर्म परिवर्तन रैकेट की ओर इशारा करता है, जो व्यापक सामाजिक और कानूनी मामलों का कारण बन सकता है।









