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न्याय प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा: जिला और सत्र न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या वर्चुअल मोड के माध्यम से सुनवाई

पक्ष या गवाह वकील के माध्यम  या स्वयं  आवेदन देकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का अनुरोध कर सकता है।
वकीलों को यूनिफॉर्म और याचिकाकर्ताओं को  शालीन कपड़ों में स्क्रीन के सामने बैठना चाहिए।
जब तक जज  बोलने को न कहें,   माइक म्यूट रखना चाहिए ताकि कोर्ट की कार्यवाही में बाधा न आए।
कानपुर:29 अगस्त 2026
नई दिल्ली: 29 अगस्त 2026
जिला और सत्र न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग  या वर्चुअल मोड के माध्यम से सुनवाई अब भारतीय न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों द्वारा बनाए गए ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम 2020’ के तहत जिला अदालतों में ऑनलाइन सुनवाई का संचालन किया जाता है।
यदि आप जिला अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल होना चाहते हैं, तो इसकी मुख्य प्रक्रिया, नियम और जरूरी बातें निम्नलिखित हैं:
1. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई के लिए अनुरोध कैसे करें?आवेदन दाखिल करना: कोई भी पक्ष (वादी/प्रतिवादी) या गवाह अपने वकील के माध्यम से या स्वयं अदालत में एक आवेदन (Application) देकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का अनुरोध कर सकता है। इस आवेदन में ऑनलाइन सुनवाई चाहने का उचित कारण बताना आवश्यक होता है।
अदालत की मंजूरी: यदि न्यायाधीश को लगता है कि आवेदन मामले को लटकाने के लिए नहीं दिया गया है और यह उचित है, तो वह इसकी अनुमति दे देते हैं।
2. VC लिंक कैसे प्राप्त करें?वाद सूची (Cause List): सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार जिला न्यायालयों को अपनी दैनिक कॉज लिस्ट के साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का लिंक (जैसे Cisco WebEx, VCONSOL या अन्य प्लेटफॉर्म) साझा करना होता है।
एसएमएस या ईमेल: ई-कोर्ट (e-Courts) सिस्टम के तहत कई बार पंजीकृत वकीलों और याचिकाकर्ताओं के मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी पर भी सुनवाई का लिंक भेजा जाता है।
3. सुनवाई के चरण और प्रक्रियासमन्वयक (Coordinator): हर जिला अदालत में एक ‘कोर्ट पॉइंट कोऑर्डिनेटर’ (जैसे कंप्यूटर सेल का कोई अधिकारी) होता है जो तकनीकी संचालन और लिंक देने का काम संभालता है।
लॉबी में प्रतीक्षा: लिंक पर क्लिक करने के बाद आप सीधे जज के सामने नहीं जाते, बल्कि पहले ‘वर्चुअल लॉबी’ में रहते हैं। जब आपका केस नंबर आता है, तब कोऑर्डिनेटर आपको मुख्य वर्चुअल कोर्ट रूम में शामिल करता है।
साक्ष्य और बहस: ऑनलाइन मोड से वकील अपनी बहस पूरी कर सकते हैं। गवाहों के बयान दर्ज करने या साक्ष्य (Evidence) प्रस्तुत करने के लिए दोनों पक्षों की सहमति या कोर्ट का विशेष निर्देश आवश्यक होता है।
4. ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण नियम (शिष्टाचार)
वर्चुअल कोर्ट रूम को भी एक सामान्य भौतिक अदालत की तरह ही माना जाता है, इसलिए निम्नलिखित नियमों का पालन अनिवार्य है:
पोशाक ): वकीलों को अपनी निर्धारित यूनिफॉर्म में होना चाहिए और सामान्य नागरिकों/याचिकाकर्ताओं को भी सभ्य व शालीन कपड़ों में स्क्रीन के सामने बैठना चाहिए।
संबोधन: न्यायाधीश को “योर ऑनर” या “सर/मैडम” कहकर ही संबोधित करना होता है।
माइक म्यूट रखना: जब तक आपका केस न आए या जज आपसे बोलने को न कहें, तब तक अपना माइक म्यूट रखना चाहिए ताकि कोर्ट की कार्यवाही में बाधा न आए।
अनुशासन: वर्चुअल सुनवाई के दौरान गाड़ी चलाना, खाना खाना या किसी अनुचित स्थान (जैसे टॉयलेट आदि) से जुड़ना अदालत की अवमानना (Contempt of Court) माना जाता है और भारी जुर्माना हो सकता है।

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