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शिकायत के बाद उजागर 650 करोड़ रुपये के टेंडर मामले में 6 एफआईआर दर्ज: ₹100 करोड़ के टेंडर रद्द :मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और भाजपा पार्षदों की शिकायत

निगम मुख्यालय से फर्मों के रजिस्ट्रेशन, भुगतान और टेंडर से जुड़े अभिलेखों को कब्जे में लेकर जांच आगरा की रवि लवानिया ने फर्जी बैलेंस शीट लगाकर कानपुर में टेंडर हासिल कर लिया।
लापरवाही और बिना सत्यापन के फर्मों का रजिस्ट्रेशन के आरोप में अधिकारी भूपेंदर निलंबित
कानपुर:5 सितम्बर 2026
कानपुर नगर निगम में हुए बहुचर्चित टेंडर और कमीशन घोटाले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा तेजी से की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और भाजपा पार्षदों की शिकायत के बाद उजागर हुए इस 650 करोड़ रुपये के टेंडर मामले में अब तक 6 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और ₹100 करोड़ के टेंडर रद्द किए जा चुके हैं।
जांच के मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति निम्नलिखित हैं:
फर्जी कागजात और दस्तावेजों की जांचठेकेदारों की कुंडली: 
प्रभारी एडीसीपी डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में एसआईटी की टीम नगर निगम मुख्यालय से फर्मों के रजिस्ट्रेशन, भुगतान और टेंडर से जुड़े अभिलेखों को अपने कब्जे में लेकर जांच कर रही है।
दस्तावेजों का सत्यापन: ठेकेदारों द्वारा टेंडर हासिल करने के लिए इस्तेमाल किए गए अनुभव प्रमाण पत्र, हैसियत, चरित्र प्रमाण पत्र, जीएसटी दस्तावेज और बैंक खातों की गहनता से पड़ताल की जा रही है।
ब्लैकलिस्टेड कंपनियों का खेल: आगरा की रवि लवानिया नाम के ठेकेदार की फर्म (जो कई राज्यों में ब्लैकलिस्टेड थी) ने फर्जी बैलेंस शीट लगाकर अपना 4 करोड़ का टर्नओवर कागजों में 84 करोड़ रुपये दिखाया और कानपुर में टेंडर हासिल कर लिया।
60% तक कमीशन का सिंडिकेटकमीशन का गणित: जांच में यह बात सामने आई है कि टेंडर की कुल रकम का लगभग 60% हिस्सा कमीशन के रूप में सिंडिकेट और अधिकारियों के बीच बंट जाता था।
दबंगों का कब्जा: टेंडर आवंटन की प्रक्रिया को डरा-धमकाकर और लॉटरी सिस्टम का दुरुपयोग करके मैनेज किया जाता था जिसे अब नगर आयुक्त ने बंद कर दिया है।
गिरफ्तारियां और फरार आरोपीजेल भेजे गए आरोपी: पुलिस ने अब तक इस मामले में दो ठेकेदारों, संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
मास्टरमाइंड फरार: इस पूरे घोटाले का मुख्य सरगना गोविंद शर्मा अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है और उसका क्वार्टर भी सील कर दिया गया है।
अधिकारियों पर गाज: लापरवाही और बिना सत्यापन के फर्मों का रजिस्ट्रेशन करने के आरोप में एक अधिकारी (भूपेंदर) को निलंबित किया जा चुका है, वहीं कई अन्य बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी एसआईटी के रडार पर है।

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