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सुप्रीम कोर्ट : नोएडा डीएम मेधा रूपम मामले में हाई कोर्ट के आदेश में बड़ा संशोधन

हाई कोर्ट द्वारा छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की एनएसए को रद्द करने वाले मुख्य फैसले पर रोक नहीं
सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में जवाब
अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है।
कानपुर:24 सितम्बर 2026
नई दिल्ली: 24 सितम्बर 2026
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा की डीएम मेधा रूपम मामले में अपने पहले के आदेश में बड़ा संशोधन किया है। न्यायालय ने साफ किया है कि अंतरिम रोक सिर्फ इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा डीएम के खिलाफ की गई कड़ी टिप्पणियों (Strictures) और ₹5 लाख के मुआवजे के निर्देश पर ही लागू होगी। इसका मतलब यह है कि हाई कोर्ट द्वारा छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की एनएसए (NSA) हिरासत को रद्द करने वाले मुख्य फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई है।
इस मामले से जुड़े मुख्य पहलू इस प्रकार हैं:
सुप्रीम कोर्ट का संशोधित आदेश
आदेश में स्पष्टता: पहले जारी हुए आदेश से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के पूरे फैसले (हिरासत रद्द करने समेत) पर रोक लगा दी है। लेकिन जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने नए आदेश में स्पष्ट किया कि रोक सिर्फ हाई कोर्ट के फैसले के पैरा 27 से 33 पर लागू है, जिसमें अधिकारियों पर व्यक्तिगत देनदारी तय की गई थी।
अगली सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है।
क्या था इलाहाबाद हाई कोर्ट का मूल फैसला?
सैलरी से जुर्माने का आदेश: हाई कोर्ट ने नोएडा डीएम मेधा रूपम और अन्य संबंधित पुलिस अधिकारियों की सैलरी से ₹5 लाख काटकर पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का सख्त आदेश दिया था। साथ ही उनके सर्विस रिकॉर्ड में कोर्ट की नाराजगी दर्ज करने को कहा था।
संविधान के प्रति वफादारी: हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा था कि नौकरशाहों को याद रखना चाहिए कि उनकी वफादारी संवैधानिक मूल्यों के प्रति होनी चाहिए, न कि किसी राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति।
सुप्रीम कोर्ट के इस नए संशोधन के बाद फिलहाल नोएडा डीएम मेधा रूपम को अपनी सैलरी से ₹5 लाख कटने और सर्विस रिकॉर्ड खराब होने से बड़ी राहत मिल गई है, लेकिन छात्रा की रिहाई का रास्ता साफ रहेगा।
मनगढ़ंत कहानी पर हिरासत: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई गिरफ्तारी को अवैध ठहराया था। कोर्ट ने कहा था कि यह हिरासत राज्य सरकार की एक “गढ़ी हुई कहानी” पर आधारित थी।

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