EOS-05 भारत का पहला अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह है, जिसे जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया जाएगा.
प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से किया जाएगा.
उपग्रह पृथ्वी से लगभग 36,000 किमी ऊपर रहकर लगातार बड़े हिस्से की रियल-टाइम तस्वीरें ले सकेगा.
उपग्रह बड़े इलाके पर लगातार नजर बनाए रख सकता है.
कानपुर: 1 सितम्बर 2026
श्रीहरिकोटा : 1 सितम्बर 2026
इस महत्वपूर्ण मिशन से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
मिशन की मुख्य विशेषताएं भारत की पहली जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट: EOS-05 भारत का पहला ऐसा अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह है, जिसे जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया जाएगा.
36,000 किलोमीटर की ऊंचाई: यह उपग्रह पृथ्वी से लगभग 36,000 किमी ऊपर रहकर लगातार भारत और उसके आसपास के एक बड़े हिस्से की रियल-टाइम (यानी हर पल की) तस्वीरें ले सकेगा.
लगातार निगरानी क्षमता: सामान्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स पृथ्वी के चक्कर लगाते हुए किसी एक जगह की तस्वीर कुछ दिनों के अंतराल पर ले पाते हैं, लेकिन यह उपग्रह एक ही बड़े इलाके पर लगातार अपनी नजर बनाए रख सकता है.
किन क्षेत्रों में मिलेगी बड़ी मदद?
इस सैटेलाइट को भारत की “तीसरी आंख” या “सुपर आई” भी कहा जा रहा है, जिससे कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे:
राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा निगरानी: इस उपग्रह की मदद से चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों की सीमाओं पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों और सैन्य मूवमेंट पर 24 घंटे पैनी नज़र रखी जा सकेगी.
अन्य अनुप्रयोग: कृषि क्षेत्र (Agri-monitoring), पर्यावरण में आ रहे बदलावों को समझने और मौसम के सटीक पूर्वानुमान में यह देश के लिए बेहद मददगार साबित होगा.
यह मिशन ISRO के आधिकारिक मिशन पेज के अनुसार जीसैट श्रृंखला की पुरानी नाकामियों (जैसे 2021 में GSLV-F10 की विफलता) को पीछे छोड़ते हुए भारत की अंतरिक्ष निगरानी क्षमताओं को एक नई और बेहद शक्तिशाली ताकत देने वाला है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आगामी 4 सितंबर 2026 को सुबह 02:55 बजे अपने GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 (जिसे पहले GISAT-1A भी कहा जाता था) सैटेलाइट को लॉन्च करने जा रहा है. यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से किया जाएगा.
आपदा प्रबंधन : चक्रवात (Cyclone), अचानक आई बाढ़ (Flood), बादल फटना और जंगलों में लगने वाली भीषण आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं की सटीक और तुरंत जानकारी इसके ज़रिए हासिल होगी.









