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कानपुर के विजय नगर: मेट्रो कॉरिडोर-2 के निर्माण क्षेत्र और काकादेव जैसे इलाकों में मकानों में गहरी दरारें

अंडरग्राउंड स्टेशन और पिलर निर्माण के दौरान भारी मशीनों से होने वाले तीव्र कंपन
कई पक्के मकानों की दीवारों, कमरों और बीम तक में बड़ी-बड़ी दरारें
अधिकारियों का  कहना है कि निर्माण कार्य पूरी सुरक्षा मानकों के साथ
कई मामलों में दरारों को पुराना बताया जाता है
 सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय लोगों का विरोध और चिंता पूरी तरह जायज
कानपुर: 11 जुलाई 2026

कानपुर के विजय नगर (मेट्रो कॉरिडोर-2 के निर्माण क्षेत्र) और काकादेव जैसे इलाकों से जुलाई 2026 में ऐसी कई खबरें सामने आई हैं।

स्थानीय निवासियों के अनुसार:
मकानों में गहरी दरारें: अंडरग्राउंड स्टेशन और पिलर निर्माण के दौरान भारी मशीनों से होने वाले तीव्र कंपन के कारण कई पक्के मकानों की दीवारों, कमरों और बीम तक में बड़ी-बड़ी दरारें देखी गई हैं।
सुरक्षा का डर: घर गिरने के खौफ से प्रभावित इलाकों के कई परिवार रात-रात भर जागने को मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि भारी कंपन या मानसून की बारिश के कारण कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।कानपुर मेट्रो का कॉरिडोर-2 (सीएसए से बर्रा-8) कुल 8.60 किलोमीटर लंबा रूट है, जो वर्तमान में निर्माण के विभिन्न चरणों में है। यह कॉरिडोर शहर के कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों, व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा निर्धारित कॉरिडोर-2 का पूरा निर्माण क्षेत्र और स्टेशनों का विवरण दिया गया है:
भूमिगत  निर्माण क्षेत्र यह हिस्सा लगभग 4.10 किलोमीटर लंबा है, जिसमें टनल (सुरंग) का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है और वर्तमान में ट्रैक स्लैब ढलाई तथा पटरियों को जोड़ने का काम चल रहा है। इसके अंतर्गत आने वाले स्टेशन हैं:
रावतपुर

 काकादेव
डबल पुलिया
एलिवेटेड  निर्माण क्षेत्र यह हिस्सा जमीन से ऊपर पिलर पर बना है, जो लगभग 4.50 किलोमीटर लंबा है। यहां पिलर और प्लेटफॉर्म का सिविल कार्य पूरा होने के बाद प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग  स्ट्रक्चर और ट्रैक बिछाने का काम तेजी से जारी है। इसके अंतर्गत आने वाले स्टेशन हैं:
कृषि विश्वविद्यालय
विजय नगर चौराहा
 शास्त्री चौक
बर्रा-7
बर्रा-8
मेट्रो डिपो क्षेत्र सीएसए यूनिवर्सिटी परिसर: इस कॉरिडोर के लिए लगभग 37.50 एकड़ क्षेत्र में एक अत्याधुनिक मेट्रो डिपो का निर्माण किया जा रहा है। यहाँ ट्रेनों के रखरखाव और संचालन के लिए कुल 15 टेस्ट ट्रैक लाइनें बिछाई जा रही हैं।पूर्व की घटनाएं: इससे पहले भी कानपुर के हरबंश मोहाल और अन्य क्षेत्रों में मेट्रो टनल की खुदाई के कारण कुछ मकानों के धंसने या ढहने की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसके बाद प्रशासन को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा था।
प्रशासन और UPMRC का रुख:  उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन  के अधिकारियों का  कहना है कि निर्माण कार्य पूरी सुरक्षा मानकों के साथ किया जा रहा है और कई मामलों में दरारों को पुराना बताया जाता है। लेकिन सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय लोगों का विरोध और चिंता पूरी तरह जायज हैं।

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